ट्वीट करने से पहले जरा इतिहास जान लें थरूर साहब!

मगर शशि थरूर शायद ये भूल गये कि जिस टॉपिक पर वो ट्वीट कर रहे हैं उसके बारे में उन्हें पूरी जानकारी होनी चाहिए। जी हां राजनीतिक चर्चा और पब्लिसिटी बंटोरने के चक्कर में कुछ भी ट्वीट करने से पहले कम से कम शशि थरूर को आरएसएस के इतिहास के बारे में जान लेना चाहिए।
मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर बैठने के बावजूद शशि थरूर ने आरएसएस के संबंध में जो ट्वीट किया है उससे साफ जाहिर होता है कि उन्हें संघ के बारे में आधी-अधूरी जानकारी है। शशि थरूर ने अपने ट्वीट में लिखा है ''संघ की वेशभूषा इटली के 1920 के फासिस्टों से प्रभावित है''।
ऐसा माना जा रहा है कि पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन के बाद जो परिचर्चा सामने आई उसके चलते थरूर ने ये ट्वीट किया है। उल्लेखनीय है कि नरेन्द्र मोदी ने अपने इस संबोधन में कांग्रेस के जाली धर्मनिरपेक्षता पर सवाल खड़ा किया था।
थरूर के इस ट्वीट के जवाब में जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता ने ट्वीटर पर लिखा है कि ''1963 में गणतंत्र दिवस की परेड में संघ को किसने आमंत्रित किया था। अब यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है कि नेहरु के निमंत्रण पर संघ ने 1963 की गणतंत्र दिवस परेड में भाग लिया था।''
सोशल नेटवर्किंग साइट ट्वीटर पर ये घमासान देखने के बाद सिर्फ एक ही बात सामने आ रही है कि कई किताबे लिख चुके शशि थरूर को अपने इतिहासबोध को बेहतर बनाने की जरूरत है, खास कर संघ के इतिहास के बारे में।












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