यूपी में माफियाओं और बाहुबलियों का सहारा बनेंगे छोटे दल

अब अगले साल मई में निर्धारित लोकसभा चुनाव के लिए इन माफियाओं और बाहुबलियों की निगाहें फिर से छोटे दलों पर ही टिकी हैं। यह अलग बात है कि कुछ लोग बड़े दलों में भी अपनी पैठ बनाने में लगे हैं। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अंसारी बंधुओं की घरेलू पार्टी कौमी एकता दल ने भसपा व पूर्वाचल में सक्रिय कुछ अन्य छोटे दलों के साथ एकता मंच का गठन किया। एकता मंच के बैनर तले मुख्तार अंसारी का वाराणसी से और उनके बड़े भाई अफजाल अंसारी का बलिया से लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान हो चुका है।
इसी मंच से जेल में बंद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार में मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाहा भी गाजीपुर से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के टिकट पर बीते विधानसभा चुनाव में चंदौली की सैयदराजा सीट पर दूसरे स्थान पर रहे माफिया बृजेश सिंह अब चंदौली लोकसभा क्षेत्र से चुनाव में उतरना चाहते हैं। जेल में बंद बृजेश सिंह के एक करीबी ने आईएएनएस से कहा कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर प्रगतिशील मानव समाज पार्टी ने जनवादी पार्टी और वंचित जमात पार्टी के साथ राष्ट्रीय विकास मोर्चा का गठन किया है। बृजेश इसी मोर्चे के बैनर तले चंदौली से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। जल्द ही इसका आधिकारिक ऐलान किया जाएगा।
बाहुबली अतीक अहमद ने पिछला लोकसभा चुनाव अपना दल के टिकट पर प्रतापगढ़ से लड़ा था। अपना दल ने उन्हें फिर से लोकसभा का टिकट देने का ऐलान किया है। अतीक अपने लिए जिताऊ लोकसभा सीट की तलाश में जुटे हैं। उधर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के माफिया डी़ पी़ यादव भी अपने लिए समीकरण की खोज में हैं। विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव की सख्ती से समाजवादी पार्टी (सपा) में प्रवेश से वंचित रहने के बाद उन्होंने बदायूं के सहसवान से अपनी पार्टी से चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए। लोकसभा चुनाव में कहीं बात न बनने पर राष्ट्रीय परिवर्तन दल ही उनका सहारा होगा।
बाहुबलियों द्वारा छोटे दलों को चुनाव में अपना हथियार बनाने के सवाल पर अपना दल की राष्ट्रीय महासचिव एवं विधायक अनुप्रिया पटेल कहती हैं कि यह एक बेबाक सच्चाई है कि चुनाव में राजनीतिक दल और बाहुबली, दोनों एक-दूसरे का इस्तेमाल करते हैं। उधर, भसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर कहते हैं कि सपा, बसपा, कांग्रेस हो या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कोई राजनीतिक दल ऐसा नहीं है जिसने बाहुबलियों को शरण न दी हो। वह कहते हैं, "अंसारी बंधुओं से समझौते के बाद उनके इलाके में हमारी पार्टी के वोट बढ़े हैं और उन्हें हमारा लाभ मिला है। यह तो हमारी बराबर की हिस्सेदारी है।"












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