सोने की झाड़ू लगाने का रिकॉर्ड भी मोदी के नाम!
अहमदाबाद। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम वैसे तो कई रिकॉर्ड हैं। हालाँकि समर्थक और विरोधी उनके रिकॉर्ड को अपनी-अपनी तरह से भुनाते रहते हैं, परंतु जहाँ तक पुरी के बाद दूसरी सबसे बड़ी जगन्नाथ रथयात्रा अहमदाबाद के उत्सव का सवाल है, तो इस उत्सव को लेकर भी मोदी के नाम एक अनोखा रिकॉर्ड है। यह रिकॉर्ड है पहिंद विधि करने का।
आइए पहले आपको ये बता देते हैं कि पहिंद विधि क्या है? जहां तक पहिंद विधि की परम्परा का सवाल है, तो यह उड़ीसा के पुरी में आयोजित रथयात्रा की तर्ज पर 1989 में शुरू की गई। उड़ीसा में राजा के हाथों रथों को सोने की झाड़ी से साफ करवा कर पहिंद विधि की जाती है। इसके पीछे भाव यही होता है कि रथयात्रा उत्सव आम जनता से लेकर राजा तक सबका उत्सव है। जगन्नाथ मंदिर के ट्रस्टी महेन्द्रभाई झा ने बताया कि अहमदाबाद में पहली बार 1989 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरसिंह चौधरी ने पहिंद विधि की थी और रथ खींचा था। चौधरी ने यह पहल पूर्ववर्ती माधवसिंह सोलंकी सरकार के प्रति जगन्नाथ मंदिर और श्रद्धालुओं में बनी नकारात्मक छवि को मिटाने के लिए की थी। सोलंकी ने 1985 की रथयात्रा शांति-व्यवस्था बनाए रखने की आड़ में रोकने का प्रयास किया था।
मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी आगामी 10 जुलाई को अहमदाबाद में निकलने वाली 136वीं रथयात्रा में लगातार 12वीं बार यह पहिंद विधि करने वाले हैं। गुजरात से लेकर समग्र भारतीय राजनीति में विरोधियों के मंसूबों पर झाड़ू फेर रहे नरेन्द्र मोदी भगवान जगन्नाथ के रथ में 12वीं बार सोने की झाड़ू लगाएँगे और रथ खींच कर पहिंद विधि करेंगे। मोदी ने सितम्बर-2001 में मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार 2002 में निकली रथयात्रा में पहिंद विधि की थी।
केशूभाई का रिकॉर्ड तोड़ा
इससे पहले यह रिकॉर्ड केशूभाई पटेल के नाम था। उन्होंने 5 बार पहिंद विधि की थी। मोदी ने केशूभाई का यह रिकॉर्ड 2007 में छठी बार पहिंद विधि करके तोड़ दिया था। इस मामले में एकमात्र दिलीप परीख ऐसे बदकिस्मत मुख्यमंत्री रहे, जिन्हें पहिंद विधि करने का मौका ही नहीं मिला। राज्य के इतिहास में सत्ता का कार्यकाल पूरा करने का रिकॉर्ड एकमात्र माधवसिंह सोलंकी के नाम था और मोदी इस रिकॉर्ड को पहले ही तोड़ चुके हैं। दूसरी तरफ ऐतिहासिक जगन्नाथ रथयात्रा में पिछले 24 वर्षों से चली आ रही पहिंद विधि करने के मामले में मोदी ने जरूर अजेय रिकॉर्ड बना लिया है। मोदी से पहले यह रिकॉर्ड केशूभाई के नाम दर्ज था। केशूभाई ने 1995 और 1998 से 2001 की रथयात्राओं के दौरान पांच बार यह विधि कर रथ खींचा था और मोदी केशूभाई का रिकॉर्ड 2007 में ही तोड़ चुके हैं।
दिलीप परीख को नहीं मिला मौका
केशूभाई ने 2001 की रथयात्रा में पहिंद विधि कर दिवंगत मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल का रिकॉर्ड तोड़ा था। चिमनभाई ने 1990 से 1993 की रथयात्राओं में पहिंद विधि कर चार बार रथ खींचा था। इसके बाद मुख्यमंत्री बने छबीलदास मेहता ने 1994 में, सुरेशचंद्र मेहता ने 1996 में और शंकरसिंह वाघेला ने 1997 में एक-एक बार पहिंद विधि की। इस दौरान एकमात्र मुख्यमंत्री दिलीप परीख ऐसे रहे, जिन्हें विधि करने का मौका नहीं मिला। परीख 28 अक्टूबर 1997 को मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन रथयात्रा उत्सव से पहले 4 मार्च, 1998 को उनकी सत्ता चली गई थी।













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