आमिर खान से दो-दो हाथ करने मैदान में उतरे मोदी
अहमदाबाद। देश में बढ़ रहे कुपोषण पर लोगों को जागरुक करने नेता से लेकर फिल्मी हस्तियां विज्ञापण के बाजार में उतर चुकी है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत देश के कई विशेषज्ञ 40 फीसद आबादी के कुपोषित होने पर चिंता जता चुके हैं। कुपोषण के मद्दे पर केंद्र सरकार और गुजरात की मोदी सरकार के बीच कई बार जंग छिड़ चुका है। लंबी बहसों और बैठकों के बाद भी कोई हल नहीं निकला।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जब देश के 40 फीसदी बच्चों व महिलाओं में कुपोषण पर चिंता जताई, तो मुख्यमंत्री मोदी ने पीएम पर आरोप लगाते हुए कहा कि पीएम चिंता जताकर अपनी जिम्मेदारी से बच रहे है। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुपोषण से जंग के लिए सब्जी को सबसे बड़ा हथियार बताया है।

लेकिन मोदी ने ही कुपोषण पर बयान देकर देश भर में खूब बबाल मचाया था। मोदी ने कहा था, 'सौंदर्य की चाह में लड़कियां कुपोषित रह जाती हैं।' इतना ही नहीं अब अभिनेता आमिर खान के उस टीवी विज्ञापन का जबाव देने के लिए अब मोदी खुद इस मैदान में उतर रहे है। अमिर अपने विज्ञापण में कुपोषण से लड़ने का तरीका बताते हुए नारा देते है कि 'कुपोषण भारत छोड़ो'।
आमिर को जबाव देने के लिए अब मोदी सरकार ने भी कमर कस ली है। आमिर के नारे को टक्कर देने को मोदी खुद विज्ञापन में उतर आए हैं। गुजरात सरकार ने अपने विकास के कामों पर आधारित विज्ञापनों की एक सिरिज तैयार कराई है, जिसमें हर मुद्दे पर 30 से 40 सेकेंड का विज्ञापन तैयार किया गया है। जो स्थानीय चैनलों पर प्राइम टाइम में दिखाया जा रहा है। इस विज्ञापणों में मोदी ने कुपोषण से लड़ने के लिए सब्जियों को सबसे बड़ा हथियार बताया है। ऐसे ही एक विज्ञापन में मोदी कुपोषण के खिलाफ सब्जी को सबसे बड़ा हथियार बताते हैं।
गौरतलब है कि गुजरात सब्जी के उत्पादन में काफी आगे है। पिछले वर्षो में देश में सब्जी के उत्पादन में 70 फीसद वृद्धि हुई है, जबकि गुजरात में 125 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई। राज्य में उत्पादित प्याज, टमाटर, भिंडी का विदेश में भी निर्यात होता है। मोदी कृषि महोत्सव को इसका श्रेय देते हुए कहते हैं कि केंद्र सरकार गुजरात के साथ लगातर अन्यायपूर्ण बर्ताव करती है। राज्य सरकार खाद के लिए अग्रिम भुगतान कर अपनी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक की मात्रा बता देती है। फिर भी समय पर खाद नहीं मिलता। इससे पहले मोदी ने सीएजी रिपोर्ट में साफ किया था कि पिछले पांच सालों में गुजरात सरकार ने सबसे ज्यादा कुपोषण पर खर्च किया है। पिछले पांच सालों में गुजरात में कुपोषण को कंट्रोल करने के मामलों में 32 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।












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