भारत के लिए बेहतर साबित होंगे नवाज शरीफ
[नवीन निगम] भारत के लिए इससे खुशी की बात कोई और नहीं होगी कि पाकिस्तान में नवाज शरीफ प्रधानमंत्री बनने जा रहे है। भारत में नवाज शरीफ के विरोधी चाहे उन्हें कारगिल की जंग का आरोपी मानते हो लेकिन देखा जाए तो तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने जा रहे नवाज शरीफ और भारत के कई हित अब एक हैं। नवाज शरीफ पाक सेना से प्रताडि़त है। दो बार उनकी सत्ता सेना के कारण ही गई यहां तक की उनका हाल जुल्फिकार भुट्टों (जिन्हें जिया ने फांसी दे दी थी) जैसा होने वाला था लेकिन उन्होंने अपनी हिम्मत नहीं हारी और लोकतंत्र को मजबूत करते रहे।
यहां तक की पिछली पीपीपी की जरदारी सरकार को भी उन्होंने ही पांच साल तक खींचा। नवाज शरीफ चाहते तो जरदारी की सरकार को कब का गिरा देते लेकिन वह जानते थे कि बैलेट से चुनी गई सरकार को यदि उन्होंने गिराया तो बैलेट की जगह पाक में फिर बुलेट (सेना) हावी हो जाएगा। उनकी इसी दूरदर्शिता को लोगों ने सराहा है और उन्हें बड़ी संख्या में वोट दिए।

नवाज शरीफ के बयानों से लगता है कि वह इस बार लोकतात्रिंक पार्टियों में मतभेद नही होने देंगे, मतलब इमरान खान जो दूसरे नम्बर की पार्टी के नेता है उन्हें भी बराबर सम्मान देंगे जिससे देश में यह संदेश जाए कि लोकतात्रिंक सरकारें ठीक से काम करती है और पार्टियों में एक समझ विकसित हो चुकी है।
जुलाई में कियानी अवकाश ग्रहण करेंगे। उनके बाद ही नवाज शरीफ अपने किसी खास को सेना प्रमुखपद पर ला पाएंगे। क्योंकि इससे पहले नवाज के कुछ किया तो सेना पलट वार कर सकती है। मुझे लगता है कि नवाज शरीफ कियानी के अवकाश ग्रहण करने के बाद सेना में वहीं व्यवस्था लाएंगे जो जवाहर लाल नेहरु ने भारत में की थी।
भारत में सेना के तीनों अंगों के अध्यक्ष अलग-अलग होते है और इनका आपस में दर्जा एक बराबर का होता है। अब जब तीन व्यक्ति एक जैसे पद पर होंगे तो वह एक साथ कैसे सत्ता हथिया सकते हैं। इसी व्यवस्था के चलते भारत में जब तीनों सेना में तालमेल की बात शुरू हुई तो एक राजनीतिक व्यक्ति को इन तीनों के ऊपर सलाहकार के रुप में बैठा दिया गया। नवाज शरीफ लंदन में एक साक्षात्कार के दौरान भारत में सेना की इस व्यवस्था की तारीफ कर चुके है और पाक में वायुसेना का अब प्रभाव बढ़ चुका है। ऐसी दशा में जुलाई के बाद नवाज शरीफ अपने किसी खास को सेना प्रमुख के पद पर लाने के बाद सेना को तीन भाग में बांट सकते है जिससे सेना प्रमुख के दिमाग में सत्ता पर कब्जा करने का विचार न आ सके।
एक खास बात, पाक में इस बार तीनों प्रमुख पार्टियों ने चुनाव के दौरान कश्मीर के मुद्दे पर उतना जोर नहीं दिया जितना जोर पाक में बढ़ती दहशतगर्दी पर दिया गया इसका मतलब साफ है कि पाक कारगिल की जंग के बाद समझ गया है कि भारत से जंग लड़कर कश्मीर नहीं छीना जा सकता। बातचीत से ही इसका हल निकलेगा। इस बात को नवाज शरीफ से ज्यादा कौन जान सकता है। अटल का लाहौर दौरा और कारगिल की जंग दोनों बातें नवाज शरीफ के समय ही हुई थी। नवाज शरीफ के सामने सबसे बड़ी समस्या है पाक के अंदर समानांतर सरकार चला रहे पाक तालिबानी। नवाज जानते है कि उनकी सरकार के लिए सबसे बड़ी समस्या यह पाकिस्तान तालिबान ही खड़ा करेंगा और अमेरिका और पाक के रिश्ते भी पाक तालिबान के ही कारण बिगड़ते जा रहे हैं। अब क्योंकि पाक में पहली बार एक लोकतात्रिंक सरकार के बाद दूसरी लोकतात्रिंक सरकार आ रही है। इसलिए संभव है कि पाक की भारत नीति में भी कुछ बदलाव आए।












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