बैंगलोर पर मोदी का बुखार, पारा चढ़ा कांग्रेस का
बैंगलोर। नेशनल कॉलेज ग्राउंड के पास रविवार की शाम जब पुलिस ने घेराबंदी की, तो लोग समझ गये कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी आ रहे हैं। मोदी की एक झलक पाने को बेताब लोग सड़क के दोनों ओर कतारों में खड़े हो गये। फ्लाईओवर उतरते हुए करीब 25 कारों के काफिले में सभी की लाइट बंद थी और सायरन बज रहे थे, बस एक कार थी, जिसकी अंदर की बत्ती जल रही थी और उसमें बैठे थे मोदी और कर्नाटक के सीएम जगदीश शेट्टार।
लोगों के बीच कतारों में मैं भी खड़ा था, तभी बगल से एक युवक के मुंह से निकला, Its Modi Yaar. मुझसे रहा नहीं गया, मैंने उनसे पूछा, क्या आपको नहीं मालूम था कि मोदी आ रहे हैं? जवाब मिला, नहीं हम तो अभी मैसूर से आये हैं। मैंने पूछा, तो क्या अब आप सामने ग्राउंड में जाएंगे? तो युवक ने कहा अरे, जरूर क्यों नहीं! यह युवक था बेल्लूर का निवासी बालाराजू वेंकटेश, जो यहां इंफोसिस में जॉब करता है।
मुझे यहीं से समझ आ गया था, कि बैंगलोर पर मोदी का बुखार चढ़ चुका है। मैं भी चल पड़ा। प्रवेश द्वार पर चेकिंग के वक्त मुझे अंदर नहीं जाने दिया गया, क्योंकि मेरे हाथ में हेलमेट था, मैं फिर पलट कर अपना हेलमेट बाइक पर रखने गया, तो देखा लोगों की भीड़ मैदान की तरफ चली आ रही है। मेरे लिये बाइक तक जाना किसी नदी के विरुद्ध तैरने से कम नहीं था।
बैंगलोर का बुखार नापने के लिये भीड़ में अकेला था मैं, लोगों से बात करते-करते देखा कि लोगों के अंदर एक गजब का उत्साह भरा हुआ है। गांधीनगर के निवासी एवं बीएमटीसी में हेड क्लर्क के रूप में कार्यरत श्रीनिवासन एन से जब मैंने पूछा, कि इस भीड़ में आप अपनी दोनों बेटियों को क्यों लाये हैं, तो बोले बेटियों की जिद के आगे झुकना पड़ा। श्रीनिवासन की दोनों बेटियां पढ़ाई कर रही हैं, मैंने जब उनसे पूछा कि क्या आप पॉलिटिक्स में रुचि रखती हैं, तो जवाब न में मिला, लेकिन यहां आने का कारण सिर्फ मोदी बताया। श्रीनिवासन ने कहा कि ये देखना चाहती हैं, गुजरात को शिखर तक पहुंचाने वाले मोदी दिखते कैसे हैं।
थोड़ी ही देर बाद जब मैंने मैदान के अंदर प्रवेश किया, तो एक अजब नज़ारा देखने को मिला। चारों तरफ बनी सीढ़ियां खचाखच भरी थीं। आगे पड़ी करीब 5 हजार कुर्सियों में से एक भी खाली नहीं। कुर्सियों की कतार जहां खत्म होती, हजारों की संख्या में लोग दिखाई दे रहे थे। यहीं पर युवाओं का एक पूरा ग्रुप दिखाई दिया, जिसमें अधिकांश लड़के लोअर, बरमूडा, टीशर्ट्स में खड़े थे। मैंने उनसे बात करने से पहले उनकी आपस की बातें सुनीं- "तुम्हें पता है मोदी गुजरात को बहुत आगे ले गये हैं", दूसरा बोला, "ओए जरा सोच अगर सेंटर में इनकी सरकार आ गई, तो क्या होगा।" इसी बीच मैंने थोड़ा सा दखल दिया और अपना परिचय देते हुए एक सवाल पूछा, "क्या आपको यकीन है, कि मोदी पीएम बनने के बाद देश को आगे ले जायेंगे?" उसी ग्रुप में से विश्वैश्वर्या कॉलेज में बीटेक के छात्र अंकित मल्होत्रा ने कहा, जरूर ले जायेंगे। आप मोदी का सपोर्ट क्यों कर रहे हैं, तभी उसी कॉलेज के अन्य छात्र महेश कुदेसिया ने कहा, "आज कल पूरे देश में जब भी विकास के किसी मॉडल की बात आती है, तो लोग सीधे गुजरात का नाम लेते हैं, यहां तक हमारे कॉलेज में भी इसी बात की चर्चा होती है, कि क्या गुजरात के शहर अब बैंगलोर से भी आगे निकल गये हैं। कर्नाटक में भाजपा, जीते या नहीं, लेकिन केंद्र में सरकार भाजपा की और पीएम मोदी को बनाना चाहिये, क्योंकि सारे राज्य नहीं, तो कम से कम दो चार राज्यों की लॉटरी तो लग ही जायेगी।"
इसी दौरान जब मोदी ने भाषण शुरू किया, तो जोग बिना कोई नारेबाजी किये भाषण सुनने लगे। इनमें से अधिकांश ऐसे थे, जिन्हें हिन्दी नहीं आती थी, लेकिन फिर भी वो समझने की पूरी कोशिश कर रहे थे। मेरे आगे ही खड़े कोयंबटूर रहने वाले तिरुवल्ली कृष्णन को जरा भी हिन्दी नहीं समझ में आती थी, तो वो अपने साथ अपने मित्र को लेकर गये, जो बीच-बीच में उन्हें अनुवाद करके बता रहे थे। यह नज़ारा देख मेरे मन में एक ही बात आयी, "देखो देश के लोग कितनी आस भरी नजरों से मोदी की ओर देख रहे हैं।"
जी हां यह आस, यह जुनून, एक नेता के लिये प्यार और वर्तमान में केंद्र सरकार की नीतियों से मिली पीड़ा थी, जो लोगों को यहां खींच लायी। लोगों के अंदर एक आग जलती दिखाई दी और उस आग में घी डालने का काम किया मोदी के भाषण ने। मोदी ने अपने भाषण में कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने पूछा कि अब तक कांग्रेस ने सीएम प्रत्याशी क्यों नहीं घोषित किया, कांग्रेसियों हाथ दिखाते हो, चेहरा तो दिखाओ।
एक तरफ बैंगलोर पर मोदी का बुखार और दूसरी तरफ मोदी के वार। निश्चित तौर पर कांग्रेस नेताओं का पारा गर्म हो गया होगा। खास बात यह है कि मोदी ने जो आज कांग्रेस पर ओले बरसाये हैं, वो ठंडक पहुंचाने वाले नहीं, बल्कि तबाही मचाने वाले थे। कुल मिलाकर देखा जाये तो जनता का प्यार और मोदी की बढ़ती लोकप्रियता कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी के लिये खतरे की घंटी बजा रही है।













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