93 मुंबई: संजय के बाद 3 और दोषियों को मिला सरेंडर के लिए 1 महीने का वक्त

 yusuf nulwala
नयी दिल्ली। 1993 मुंबई ब्लास्ट मामले में संजय दत्त के आलावा तीन और दोषियों को सुप्रीम कोर्ट से 4 हफ्ते की मोहलत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय आधार पर तीनों को एक महीने की मोहलत दी है। सुप्रीम कोर्ट से राहत पाने वालों में संजय दत्त के दोस्त युसूफ नलवाला,आफताब अली और ईशा मेमन शामिल है। कोर्ट ने इन्हें सरेंडर करने के लिए एक महीने का वक्त दिया है। जबकि कोर्ट ने तीन लोगों की राहत याचिका पर अभी सुनवाई नहीं की है।

कोर्ट ने मुंबई हमले के एक और आरोपी जैबुन्निसा की याचिका ठुकरा दी थी। आज एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट 2 बजे उनके याचिका पर पुनर्विचार करेंगी। कोर्ट ने यूसूफ नलवाला,आफताब अली और ईशा मेमन को कोर्ट ने मानवीय आधार के अलावा राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि चुंकि यूसुफ नलवाला की पुर्नविचार याचनिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है इसलिए उन्हें सरेंडर करने के लिए 4 हफ्ते का वक्त दिया जा रहा है।

जबकि कोर्ट ने वहीं दूसरे आरोपी आफताब अली को सराहत देते हुए कहा कि उनकी पत्नी इस वक्त गर्भवती है और अगले महीने बच्चे को जन्म देने वाली है। ऐसे में उनकी पत्नी को सबसे ज्यादा जरुरत अपने पति की है। वहीं ईशा मेमन को सरेंडर करने के लिए कोर्ट ने 4 हफ्ते का वक्त देते हुए कहा कि मेमन को ब्रेन ट्यूमर है और अगले महीने उनकी सर्जरी होनी है। ऐसे में कोर्ट उन्हें सरेंडर करने के लिए एक महीने की मोहलत देती है।

कोर्ट ने 993 के मुंबई हमले के दोषी संजय दत्त के दोस्त यूसुफ नलवाला को सरेंडर से ठीक पहले एक महीने की मोहलत दी है। यूसुफ नलवाला को भी आर्म्स एक्ट में छह साल की सजा सुनाई गई है। संजय के दोस्त नलवाला ने ही एके-47 रायफल नष्ट करने में उनकी मदद की थी। वहीं दूसरी ओर जैबुन्निसा को भी हथियार रखने का दोषी मानकर पांच साल की सजा सुनाई है। जैबुन्निसा वर्ष 1993 के मुंबई बम विस्फोटों में सह-आरोपी थीं। कोर्ट उन्हें भी पांच साल कैद की सजा सुनाई है।

इससे पहले यूसुफ नलवाला, जैबुन्निसा समेत आज 34 लोगों को सरेंडर करना था, लेकिन संजय दत्त के साथ-साथ उनके दोस्त नलवाला को एक महीने की मोहलत मिल गई है। इससे पहले जैबुन्निसा ने भी सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर कोर्ट से सरेंडर करने का वक्त मांगा था, लेकिन आज की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जैबुन्निसा अनवर काजी के साथ- साथ शरीफ अब्दुल गफूर और इशहाक मोहम्मद हजवानी की अर्जी भी खारिज कर दी।

गौरतलब है कि संजय को सुप्रीम कोर्ट ने 1993 मुंबई धमाके के मामले में अवैध हथियार रखने के जुर्म में आर्म एक्ट के तहत 5 साल की सजा सुनाई है। इन 5 साल की सजा में संजय पहले ही 13 महीने का वक्त जेल में बिता चुके हैं ऐसे में संजय को अब तकरीबन 3 साल का वक्त जेल में गुजारना होगा। 1993 बम विस्फोटों में कोर्ट ने याकूब मेनन की फांसी की सज़ा को बरकरार रखा है।

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