आजाद भारत में फांसी पाने वाली पहली महिला होगी सोनिया
अंबाला जेल में बंद सोनिया- संजीव को विधायक की हत्या का दोषी मानकर मौत की सजा सुनाई गई थी। जिसके बाद में इन्होंने राष्ट्रपति से दया की याचिका की मांग की थी। जेल में बंद इन दोनों ने कई बार वहां से भागने की कोशिश भी की थी। प्रॉपर्टी की लालच में 23 अगस्त 2001 को इन दोनों ने मिलकर जिले के प्रभुवाला गांव में पूर्व विधायक रेलूराम व उसके परिवार के आठ लोगों की हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद 2004 को सेशन कोर्ट ने इन्हें फांसी की सजा सुनाई थी। जिसे बाद में 2005 को हाई कोर्ट उम्रकैद में बदल दिया था।
बाद में 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने वापस से सेशन कोर्ट की सजा बरकरार रखने का फैसला दिया। समीक्षा याचिका खारिज होने के बाद सोनिया व संजीव ने राष्ट्रपति के पास दया के लिए याचिका लगाई। जिसे अब राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दया याचिका खारिज कर दी है। राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज होने के बाद अब यह मामला एक बार गृह मंत्रालय चला जाएगा। जहां से फाइल फिर सेशन जज हिसार को भेजी जाएगी। जिसके बाद सेशन जज फांसी देने के लिए डेथ वारंट की तिथि निर्धारित करेंगे।
गौरतलब है कि इससे पहले राजीव गांधी हत्याकांड की दोषी नलिनी सिंह को उच्चतम न्यायालय ने फांसी की सजा सुनाई गई थी। जिसके बाद खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हस्तक्षेप कर नलिनी सिंह को फांसी से राहत दिलवाई थी। तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के पास पहुंची दया याचिका पर उन्होंने पैरवी की थी। जिसके बाद उसकी फांसी की सजा को बदल कर उम्रकैद कर दिया था। नलिनी सिंह की दया याचिका स्वीकर होने के बाद पूर्व विधायक की हत्या के दोषी सोनिया फांसी की सजा पाने वाली देश की पहली महिला होगी।













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