अटल-आडवाणी की तारीफ कर कांग्रेस को डरा रही सपा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव सियासी चाल चलने में माहिर हैं। सपा के इस कद्दावर नेता ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुछ नेताओं की तारीफ कर कांग्रेस को साफ संदेश दिया कि राजनीतिक विवशताओं की वजह से वे भले ही वह कांग्रेस को समर्थन दे रहे हैं, लेकिन समय आने पर वह व्यक्तिगत मुद्दों पर भाजपा का सहयोग लेने से भी नहीं हिचकेंगे।
राजनीतिक टिप्पणीकारों की मानें तो अटल और आडवाणी की तारीफ के बहाने सपा एक तीर से कई निशाने साधना चाहती है। सपा एक ओर जहां आम चुनाव के बाद नए राजनीतिक समीकरणों की टोह ले रही है, वहीं दूसरी ओर वह कांग्रेस को चिढ़ाने के लिए भी बयान दे रही है, क्योंकि आए दिन कांग्रेस सीबीआई के बहाने सपा पर दबाव डालती रहती है। मुलायम के अलावा सपा का कोई भी नेता हालांकि इस मामले में मुंह खोलने की हिम्मत नहीं दिखा रहा है।
डॉ. राममनोहर लोहिया की 103वीं जयंती के मौके पर शनिवार को मुलायम ने कहा कि आडवाणी भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। कई मामलों में उनकी बेबाक राय होती है। वह कभी झूठ नहीं बोलते। मुलायम से पहले रामगोपाल यादव ने भी एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में अटल के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार को बेहतर बताकर कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार को चिढ़ाने की कोशिश की थी।
वरिष्ठ पत्रकार सुभाष राय ने आईएएनएस से कहा, "सपा के ऐसे बयान के दो मायने हो सकते हैं। एक तो शायद वह इन बयानों के माध्यम से कांग्रेस को चिढ़ाने की कोशिश कर रही हो। दूसरी, मुलायम और रामगोपाल के बयानों से ऐसा लगता है कि सपा की नजर आम चुनाव के बाद किसी नए समीकरण पर है।"
सुभाष राय कहते हैं कि आम चुनाव के बाद भाजपा को साथ लेकर किसी तरह के नए राजनीतिक समीकरण की संभावना नहीं दिखती। इसकी वजह मुसलमान मतदाता हैं। मुसलमानों की बदौलत ही सपा सत्ता में आई है। वह नहीं चाहेगी कि लोकसभा चुनाव में यह वोट बैंक उससे दूर जाए। मुलायम ने वर्तमान लोकसभा सत्र के दौरान ही लोकसभा में खुलेआम कहा था कि यदि भाजपा मुसलमानों, कश्मीर और राम मंदिर के प्रति अपना नजरिया बदल ले तो उसे भाजपा के साथ खड़े होने पर कोई आपत्ति नहीं है।
आडवाणी की तारीफ को लेकर मुलायम के बयान को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने महज शिष्टाचार करार दिया। वाजपेयी ने कहा, "मुझे लगता है कि राष्ट्रीय नेतृत्व के वरिष्ठ नेताओं के बीच आपसी शिष्टाचार की भावना होती है। शायद उसी वजह से मुलायम ने उनकी तारीफ की होगी।" वाजपेयी ने कहा कि मुलायम यदि भाजपा को लेकर वाकई गंभीर हैं तो उन्हें करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र राम मंदिर के बारे में भी सोचना चाहिए।
'आउटलुक' पत्रिका के वरिष्ठ पत्रकार कुमार पंकज की मानें तो मुलायम सिंह इस तरह के बयान देकर कांग्रेस को यह दिखाना चाहते हैं कि वह सीबीआई के डर से उसके दबाव में आने वाले नहीं हैं। पंकज कहते हैं, "मुलायम ठीक वही कर रहे हैं जो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कर रहे हैं। नीतीश कुमार भी भाजपा को डराने के लिए कांग्रेस के प्रति 'सॉफ्ट कार्नर' वाले बयान देते रहते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।













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