महिला दिवस: आधी आबादी का पूरा सच

नई दिल्‍ली। देश और पूरा विश्व आज उस आधी आबादी का सम्मान कर रहा है, जिसने इस दुनिया का सृजन किया। भले ही लोग उसे अबला मान रहे हों लेकिन ये वो ताकत है जो दुनिया में अपनी शक्ति का लोहा मना चुकी है। इनकी ताकत अब किसी परिचय की मोहताज नहीं रह गई है।

महिलाओं के अधिकारों को लेकर भारत समेत पूरी दुनिया में हर पल आवाजें उठती रहती हैं। हर जगह महिलाओं को दबी कुचली मान कर उन पर बहस छिड़ जाती है। जबकि सच पूछिए तो हर महिला प्रेरणा का एक स्रोत है। गृहणियों से लेकर कॉर्पोरेट जगत तक काम करने वाली हर महिला की हम बात कर रहे हैं। इसीलिये हम आज बात कर रहे हैं उन महिलाओं की, जो लोगों के लिये इंस्पिरेशन बनीं। उनकी आवाज हमेशा हमारे कानों में सुनाई देती रहेगी। जिन्होंने न सिर्फ महिलाओं को सम्मान से जीना सिखाया बल्कि अंतरराष्ट्रीय जगत में भी काफी शोहरत पाई।

विश्‍व महिला दिवस पर विशेष प्रस्‍तुति

अनेक चुनौतियों को दरकिनार कर इन महिलाओं ने जो मुकाम हासिल किया वह वास्तव में सराहनीय है। ये वो महिलाएं है जिसका लोहा दुनिया ने माना है। जहां पहले नारी को अबला माना जाता था वहीं नारी आज देश और दुनिया की कमान संभाल रही है। यह महिलाएं आज भी देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में प्रेरणा का स्रोत बन गईं।

ये वो महिलाएं हैं, जो दूसरों के लिये प्रेरणा बनीं

कादंबिनी गांगुली

कादंबिनी गांगुली

देश में भले ही महिलाओं को उच्चतर शिक्षा पाने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा हो लेकिन भारत को पहली महिला डॉक्टर 19वीं सदी में ही मिल गई थी। कादंबिनी गांगुली को न सिर्फ देश की पहला महिला फिजीशियन बनने का गौरव हासिल हुआ बल्कि वह देश की पहली महिला ग्रेजुएट भी हैं। उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी से स्नातक स्तर की डिग्री प्राप्त की। बंगाल मेडिकल कॉलेज से स्नातक होने के बाद साल 1866 में कादंबिनी पहली डाक्टर बनीं। ये पहली साउथ एशियन महिला थीं, जिन्होंने यूरोपियन मेडिसिन में प्रशिक्षण लिया था। कादंबिनी ने कोयले के खदानों में काम करने महिलाओं की स्थिति पर भी काफी काम किया था।

होमई व्यारावाला

होमई व्यारावाला

देश की पहली फोटो जर्नलिस्ट बनीं होमई व्यारावाला। साल 1930 में अपने करियर की शुरुआत करने वाली होमई आज के समय में भी कई फोटो जर्नलिस्ट की प्रेरणा हैं।लक्ष्मी सहगल - पहली महिला कमांडिंग ऑफिसर लक्ष्मी सहगल ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अपना योगदान दिया था। भारतीय सेना की आर्मी ऑफिसर बनने से पहले वे एक स्वतंत्र सेनानी थीं।

हरिता कौर देवल

हरिता कौर देवल

पहली महिला एयरफोर्स पायलट हरिता कौर देवल ने एविएशन उद्योग में अपनी एक अलग पहचान बनाईं थी। साल 1994 में वे देश की पहली महिला एयरफोर्स पायलट बनीं। विजया लक्ष्मी पंडित - संयुक्त राष्ट्र की पहली महिला अध्यक्षा बनीं।

विजया लक्ष्मी पंडित

विजया लक्ष्मी पंडित

विजया लक्ष्मी पंडित- जवाहर लाल नेहरू की बहन लक्ष्मी पंडित पब्लिक हेल्थ सेक्टर की पहली महिला मंत्री बनीं।

मदर टेरेसा

मदर टेरेसा

मदर टेरेसा - इन्सान की सेवा ईश्वर की सेवा के समतुल्य है। ऐसी भावना रखने वाली मदर टेरेसा भारत की पहली महिला चुनी गईं, जिन्हें नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

पीटी ऊषा

पीटी ऊषा

पीटी ऊषा - ओलंपिक खेल के अंतिम पड़ाव तक पहुंचने वाली भारत की पहली महिला हैं पी टी उषा।

कल्पना चावला

कल्पना चावला

कल्पना चावला- अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली पहली भारतीय महिला हैं। उन्‍होंने अपने उद्यम और साहस का परिचय दिया।

प्रतिभा देवी सिंह पाटिल

प्रतिभा देवी सिंह पाटिल

प्रतिभा देवी सिंह पाटिल- देश की पहली महिला राष्ट्रपति होने का सम्मान इन्हें हासिल हुआ है।

मीरा कुमार

मीरा कुमार

मीरा कुमार देश की पहली महिला लोकसभा स्पीकर। अल्पसंख्यक होते हुए भी उन्होंने इस मुकाम को हासिल किया और इस पद को हासिल किया।

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