महाकुंभ- कहां जाता है करोड़ों श्रद्धालुओं का मल?
इलाहाबाद। बसंत पंचमी के उपलक्ष्य में इलाहाबाद में संगम के तट पर 2 करोड़ से ज्यादा लोग स्नान के लिये पहुंचे। सभी ने पूरी श्रद्धा के साथ गंगा मैया का पूजन किया और स्नान के बाद वहां से निकल गये। इससे पहले मौनी अमावस्या के दिन यह संख्या ढाई करोड़ थी और उससे पहले मकर संक्रांति के दिन भी करीब 3 करोड़ लोग यहां आये। जाहिर है अगर लोगों ने यहां आकर स्नान किया है, तो शौच भी किया होगा। क्या आपको मालूम है, महाकुंभ में करोड़ों लोगों के शरीर से निकला मल इलाहाबाद के किसी कोने में जाता है?
शायद यह पढ़कर आप मुस्कुराये होंगे। हमारे लिये यह भले ही मजाक का विषय हो, लेकिन उन 7000 सफाईकर्मियों से पूछिये, जिन लोगों ने करोड़ों लोगों के लिये शौच की व्यवस्था की। उन लोगों से पूछिये, जो पूरे-पूरे दिन लगकर अस्थाई शौचालयों की सफाई कर रहे हैं। अगर इलाहाबाद के मैनहोलों पर नजर डालें तो इस समय खचाखच भरे हुए हैं। शहर के कई हिस्सों में मैनहोल ओवरफ्लो हो चुके हैं।
वहीं गंगा के तट पर बने शौचायलों से निकलने वाले मल के बारे में सुनकर आपको ताज्जुब होगा। असल में इस मल से खाद का निर्माण किया जा रहा है। यहां से निकलने वाले मल को संगम से 15 किलोमीटर दूर स्थित एक रीसाईकिल सेंटर में पहुंचाया जा रहा है, जहां खाद बनायी जाती है। यही नहीं पूजा-पाठ के बाद तट पर पाया जाने वाला जैविक कचरा भी इसी प्लांट को भेजा जाता है।
लोग यहां पूजा-पाठ करने के बाद गंगा के तट पर जो प्लास्टिक फेंक कर चले जाते हैं, उसे रीसाइकिल के लिये भेजा जाता है। अगर मौनी अमावस्या की बात करें तो उसी दिन गंगा के तट पर 700,000 किलो प्लास्टिक का कूड़ा निकला। मकर संक्रांति के दिन यहां से करीब 10000 टन कूड़ा निकला। वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की मैनेजर प्रीति गलने के मुताबिक महाकुंभ से आने वाले कूड़े से खाद, प्लास्टिक, इंटरलॉकिंग टाइल्स आदि का निर्माण किया जाता है।













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