बीजेपी के महाकुंभ हाईजैक से कांग्रेस परेशान
इलाहाबाद। 2014 लोकसभा चुनावों की तैयारी में जुटी बीजेपी ने महाकुंभ को लगभग हाईजैक कर लिया है। संगम स्थल में बीजेपी नेताओं के जमावड़े और विश्व हिन्दुओं परिषद के समर्थक संतों की बैठक ने कांग्रेस की बैचेनी बढ़ा दी है। उन्हें लग रहा है कि बीजेपी ने मौके का फायदा उठाते हुए महाकुंभ को अपने कब्जे में कर लिया है। दोनों पार्टियों के बीच इसी खींचतान को देखते हुए कुंभ में राजनीतिक बिसात बिछ गई है। बीजेपी की तैयारियों को देखते हुए कांग्रेस ने भी दांव चलने की तैयारी शुरू कर दिए है।
कुंभ में आज विहिप की मार्गदर्शन बैठक में राजनाथ सिंह ने हिन्दुत्व पर जोर देते हुए एकबार फिर से अयोध्या राम मंदिर मुद्दे को हवा दे दी है। महाकुंभ में संतों के बीच से बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण राम जन्मभूमि पर ही होगा। राममंदिर निर्माण की बात कर राजनाथ सिंह ने 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी के मुख्य एजेंडे की घोषणा तो कर ही दी है। ऐसे में कांगेस को लग रहा है कि बीजेपी कही कुंभ का फायदा उठाकर बाजी ना मार ले। इसलिेए कयास लगाए जा रहे है कि बीजेपी पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुंभ यात्रा के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी संगम में डुबकी लगानेकी घोषणा कर सकती है।
यही नहीं खबर ये भी है कि कांग्रेस उन संतों तक पहुंचने की कोशिश में लगी है जो अबतक बीजेपी के टैग से बाहर है। दरअसल हाल ही में कुंभ आए योगगुरु बाबा रामदेव ने कांगेस को चुनौती देते हुए कहा था कि आगामी लोकसभा चुनाव में वो अपने दम पर तीन सौ उम्मीदवारों को जिताएंगे और रामनवमी के बाद कांग्रेस की सत्ता को उखाड़ फेकने कि लिए अभियान चलाएंगे। बाबा की इस चुनौती को गंभीरता से लेने कि लिए कांग्रेस ने अब सरकार समर्थक संतों की खोजबीन शुरु कर दी है।
बीजेपी के कुंभ अभियान को तोड़ने के लिए कांग्रेस ने भी अपनी सेना इस मंथन में उतारने कीतैयारी कर ली है। तय कार्यक्रम के मुताबिक कांग्रेस सांसद सतपाल महराज, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, यूपी की प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी संगम में सियासी डुबकी लगाने आ सकते है। अगर सेनाओं से काम नहीं बना तो कांग्रेस दिग्गज में कुंभ के इस सियायी अखाड़े में उतारे जा सकते है। सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी और सोनिया गांधी बीजेपी से दो-दो हाथ करने संगम के इस महामंथन में डुबकी लगाने आ सकते है।
2014 की लोकसभा इलेक्शन ने संगम के इस महाकुंभ को धर्मिक अनुष्ठान से ज्यादा सियासी अखाड़ा बना दिया है। जहां हर पार्टी अपने लिए संभावनाएं तलाश रही है। ये पार्टियां जानती है कि इस वक्त पूरे देश की निगाहें संगम पर टिकी है ऐसे में लोगों को ध्यान और वोट बैक की राजनीति करने से कोई नहीं चूकना चाहता।













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