महाकुंभ के पहले दिन 15 लाख लोगों ने लगाई डुबकियां
इलाहाबाद। 12 साल में एक बार आने वाले महाकुंभ में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर करीब 15 लाख लोगों ने इलाहाबाद पहुंच कर गंगा नदी में डुबकी लगाई। ऐसा माना जाता है कि कुंभ मेले के दौरान गंगा नदी में डुबकी लगाने से जीवन भर के पाप धुल जाते हैं। गंगा नदी के तट पर इस समय इतनी भीड़ है, जितनी ओलंपिक के दौरान एथेंस में भी नहीं हुआ करती थी।
इलाहाबा में कुंभ का मेला गंगा नदी के तट पर लगता है, जहां पर यमुना और सरस्वती नदियां इसमें मिलती हैं। इसे संगम भी कहा जाता है। अगले दो महीनों में यहां 1000 लाख लोगों के आने की संभावना है। मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में सुबह आठ बजे पहला शाही स्नान हुआ, जिसमें दूर-दूर से आये साधु संतों ने गंगा नदी में स्नान किया। मकर संक्रांति का राशियों पर प्रभाव।
इस दौरान अधिकांश साधु संत निर्वस्त रहते हैं। इनमें से अधिकांश लोग तो सिर्फ फल ही खाते हैं। इस मौके पर 77 वर्षीय स्वामी शंकरानंद सरस्वती ने नग्न अवस्था में नदी के तट पर शाही स्नान किया। स्वामी जी एक समय में सरकरी नौकरी करते थे। 20 साल पहले उन्होंने संन्यास ले लिया और तब से लेकर अब तक वो सिर्फ फल और मेवा खाते हैं।
देश में चार स्थानों पर कुंभ का आयोजन होता है- इलाहाबाद, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक, जिनमें इलाहाबाद का कुंभ सबसे शुभ माना जाता है। पिछले 2000 साल से कुंभ के मौके पर देश भर के साधुओं का मिलन होता आ रहा है।
महाकुंभ के लिये इलाहाबाद में भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है। केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं। इस दौरान नदी के तट पर करीब 35 हजार अस्थाई शौचालय बनाये गये हैं। साथ ही तट तक जाने के लिये सड़कों का निर्माण किया गया है।













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