किन परिस्थितियों में हो सकता है भारत-पाक में युद्ध?

बेंगलूरु (अजय मोहन)। भारतीय सैनिकों के सिर कलम किये जाने की वारदात के बाद पैदा हुई भारत-पाकिस्‍तान के बीच खटास में लश्‍कर-ए-तैयबा के संस्‍थापक हाफिज सईद की धमकी ने और खटाई झोंक दी है। सरहद पर तैनात जवानों को अलर्ट कर दिया गया है। अब वायुसेना के प्रमुख एन के ब्राउन का यह कहना कि भारत पाकिस्‍तान को जवाब देने के लिये दूसरे विकल्‍प के बारे में सोच सकता है, यह साफ दर्शाता है कि कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है।

कई समाचार चैनलों ने तो यहां तक कह दिया है कि स्थिति कुछ-कुछ कारगिल जैसी बनती दिख रही है। यह कहना तो जल्‍दबाजी होगा, कि भारत-पाक के सैनिक हथियार लेकर आमने-सामने खड़े हो गये हैं। लेकिन हां इस बात का अंदाजा जरूर लगाया जा सकता है, कि ऐसी कौन सी परिस्थितियां होंगी, जब भारत पड़ोसी देश को करारा जवाब देने पर मजबूर होगा। सीधे शब्‍दों में यह कि ऐसी कौन सी परिस्थितियां होंगी, जब भारत-पाक के बीच युद्ध होने की पूरी संभावना होगी।

1. बड़ा आतंकी हमला

मुंबई, दिल्‍ली, जयपुर, अहमदाबाद, आदि के बाद 26/11 हमले में तो भारत खून का घूंट पीकर रह गया, लेकिन अब भारत ऐसा कोई भी हमला बर्दाश्‍त नहीं करेगा। हाल ही में पकड़े गये आतंकवादी अबू हमजा ने जैसा कि खुलासा किया कि आईएसआई के साथ मिलकर लश्‍कर एक और 26/11 जैसा हमले की तैयारी कर रहा है, उससे यह साफ है कि पाकिस्‍तान की सरजमीं पर कहीं न कहीं भारत के खिलाफ सजिश रची जा रही है। फिर चाहे वो सिर्फ आतंकवादी ही क्‍यों न रच रहे हों। भारत ऐसे आतंकवादियों की करतूतों का जवाब अब सीधे पाकिस्‍तान को ही देगा, क्‍योंकि उन्‍हें संरक्षण वही दे रहा है।

2. सरहद पर घुसपैठ

पिछले साल के आंकड़े बताते हैं कि सरहद पर घुसपैठ भले ही कम हो गई है, लेकिन घुसपैठ की कोशिशों में कोई गिरावट नहीं आयी है। असल में पाकिस्‍तानी सेना के जवान ही कई बार आतंकवादियों को कवरिंग फायर देकर घुसपैठ करने में मदद करते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि हाल ही में सोपोर और पुंछ में हुई मुठभेड़ के दौरान आतंकी घुसपैठ करने में कामयाब रहे हों। खैर चूंकि इस बात की अभी पुष्टि नहीं हुई है, इसलिये इस पर टिप्‍पणी करना गलत होगा। लेकिन हां बार-बार आतंकियों को कवरिंग फायर देकर पाकिस्‍तान खुद के लिये गड्ढा खोद रहा है इसमें कोई शक नहीं।

3. आम जनता का दबाव

मई से जुलाई 1999 में हुए कारगिल युद्ध में भारत के 527 जवान शहीद हुए और 1,363 जवान घायल हुए। जिस समय सरहद पर युद्ध चल रहा था, उस वक्‍त न ट्विटर था, न फेसबुक और उस समय जनता भी सड़कों पर तभी निकलती थी, जब कोई राजनेता आगे चलता था, आज की जनता को देखिये। दिल्‍ली गैंगरेप एक ताज़ा उदाहरण है, जिसमें देश भर में जनता सड़क पर आयी और केंद्र सरकार पर चौतरफा दबाव बनाया। अब यदि पाक की ओर से कुछ भी उलटा हुआ तो केंद्र सरकार पर कोई राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि देश की जनता दबाव बनायेगी और उन परस्थितियों में भारत को मजबूरन कड़े कदम उठाने पड़ेंगे।

4. कश्‍मीर को नुकसान

अगर पाकिस्‍तान ने कश्‍मीर को अब कोई भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, तो यह उसके लिये बुरा होगा। क्‍योंकि भारत के अंदर बर्दाश्‍त का माददा अब खत्‍म होता दिख रहा है। विशेष राज्‍य का दर्जा रखने वाले जम्‍मू-कश्‍मीर से फौज हटाने के बारे में भारत बार-बार विचार करता है, लेकिन सिर्फ पाकिस्‍तान की बॉर्डर पर नापाक करतूतों की वजह से रुक जाता है।

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