क्या बाल ठाकरे को शिवाजी से बढ़कर मानते हैं शिवसैनिक?
सीधा सवाल शिवसैनिकों से- क्या बाल साहब ठाकरे, छत्रपति शिवाजी से बढ़कर हैं? हां तो क्यों, और अगर नहीं, तो शिवाजी पार्क को लेकर इतना बवाल क्यों किया जा रहा है? दूसरा सवाल यह कि अगर आज बीएमसी उनकी बात मान लेता है, तो क्या गारंटी है कि कल यही शिवसेना शिवाजी पार्क का नाम बदलकर बाला साहब ठाकरे पार्क करने की मांग नहीं करेगी?

छत्रपति शिवाजी जिनका नाम आते ही मराठियों का सिर झुक जाता है। शिवाजी जिनके नाम से रेलवे स्टेशन से लेकर कई इमारतें और स्मारक राज्य के अलग-अलग स्थानों पर बने हुए हैं। उन्होंने महाराष्ट्र को स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। आज मुंबई में उन्हीं के नाम से बने सबसे बड़े पार्क पर बाला साहब का स्मारक बनाने की बात की जा रही है।
इसे लेकर शिवसैनिक अपने पर अड़े हुए हैं कि बाला साहब का स्मारक इसी पार्क में वो बनाकर रहेंगे। यही कारण है कि दर्जनों शिवसैनिक पार्क पर डेरा जमाये बैठे हुए हैं। जबकि उन्हें मालूम होना चाहिये कि उनकी खुद की पार्टी का नाम शिवाजी के नाम से बना है, ना कि भगवान शिव के नाम पर। बाला साहब शिवाजी के पुजारी थे इसीजिये उन्होंने अपनी पार्टी का नाम उनके नाम पर रखा।
बीएमसी की तमाम नोटिसों के बावजूद शिवसैनिक पार्क में डेरा जमाये हुए हैं। एक बार अगर बीएमसी उनकी बात मान भी ले तो क्या गारंटी है कि आगे चलकर पार्क का नाम शिवाजी की जगह बाला साहब के नाम पर करने की बात नहीं उठेगी। अगर ऐसा हुआ तो फिर यही कहा जायेगा कि बाला साहब से लाखों शिवसैनिकों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं।
वहीं बाला साहब के भतीजे राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की बात करें तो वो स्मारक का विरोध पहले ही कर चुकी है। मनसे के विधायक बाला नंदगोआंकर ने कहा था, "हम हमेशा से स्मारक बनाने की जगह ऐसी परियोजनाओं के पक्ष में रहते हैं, जिससे जनता का भला हो। यहां तक हम अरब सागर में शिवाजी का स्मारक बनाने तक का विरोध करते हैं।"












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