FDI पर बहस: सुषमा ने मैकडॉनल्ड, पेप्सी को भी लपेटा

सुषमा स्वराज ने कहा, "सरकार कहती है कि रिटेल में एफडीआई से भारतीय किसानों को फायदा पहुंचेगा, बिचौलिये खत्म होंगे। मैं सरकार से पूछा चाहती हूं कि मैक डॉनल्ड बर्गर भारत से कितना आलू खरीदता है। सच पूछिए तो वो कभी भारतीय किसानों से आलू नहीं खरीदते। कहते हैं कि आलू अच्छा नहीं है। मैकडॉनल्ड के बर्गर बनाने के लिये बाहर से जहाजों पर लद कर आलू आता है। और यहां के आलू की बोरियां धरी रह जाती हैं।
नेता विपक्ष ने आगे कहा, "मैं उस टमाटो सॉस बनाने वाली विदेशी कंपनी का उदाहरण देना चाहती हूं, जिसने पंजाब में फैक्ट्री डाली, यह कहकर कि वो यहां के आलू और टमाटर खरीदेगी, लेकिन जब फसल पूरी हुई तो कह दिया कि आलू मीठा है इसके चिप्स नहीं बन सकते, टमाटर खट्टा है, इसका सॉस नहीं बन सकता। मैं सरकार को बताना चाहूंगी कि विदेशी रिटेल कंपनियां आयीं तो फल खरीदते वक्त सेब की पेटियां चेक करेंगी और अगर एक भी सेब खराब निकला तो वो पेटी नहीं बल्कि पूरे ट्रक वापस लौटा दिये जायेंगे। यानी किसान का माल फिर धरा का धरा रह जायेगा।"
सुषमा स्वराज ने इससे पहले कहा, "दुनिया जानती है कि ये कंपनियां पिगेटरी प्राइसिंग करते हैं, पहले दाम इतने कम कर देंगे, इतने नीचे कर देंगे कि बाजार में अन्य दुकानें घाटे में चली जाती हैं। एक समय आता है जब दुकानें बंद हो जाती हैं। जब दुकानें बंद हो जाती हैं तब ग्राहक के पास इनके अलावा कोई चारा नहीं रहता। ये हर चीज में कटौती कर सकती हैं, लेकिन मुनाफे में नहीं। ये लोग किसानों को दाम कभी ज्यादा नहीं देते हैं। ये लोग अपने कर्मचारियों को कम वेतन देकर अपना प्रॉफिट पूरा रखकर के काम करते हैं।
पूरे विश्व में जहां-जहां रिटेल का यूरोपियन यूनियन की संसद ने एक डिक्ल्यरेशन एडॉप्ट किया- बड़े सुपर मार्केट उपभोक्ताओं की खरीददारी की क्षमता पर प्रहार कर रही हैं। कई देशों के किसानों ने आंदोलन किया, उसके बाद ईयू ने यह घोषणा की।












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