खूब बोले मनमोहन, इस वर्ष दिए 100 भाषण

प्रधानमंत्री ने इन भाषणों में जनता के सवालों का तो जवाब दिया ही है साथ ही अपने ऊपर काम न करने और पॉलिसी पैरालिसिस जैसे आरोपों को भी नकार दिया है। अगर हम यूपीए 1 में दिये गये उनके भाषणों पर गौर करें तो उन्होने अपने पहले कार्यकाल के दौरान 1368 भाषण दिये हैं। इस दौरान सीबीआई अफसरों के साथ हुई मीटिंग में उन्होने प्राइवेट सेक्टर में हो रहे भ्रष्टाचार को रोंकने के लिए कानूनी बदलावों की जरूरत बताई है और भ्रष्टाचार का कारण बड़े उद्योग और बड़े व्यवसायों को बताया है।
जल्द किये हैं फैसले
प्रधानमंत्री ने अपनी छवि के उलट फैसले करने में भी देर नहीं लगाई है। उन्होने कैबिनेट कमेटी आफ इकनॉमिक अफेयरर्स में 30 मिनट में पांच बड़े फैसले किए तो कैबिनेट कमेटी आफ इंफ्रास्टक्चर की 15 मिनट की बैठक में तीन बड़े फैसले को मंजूरी दी। कुल मिलाकर उन्होने 90 मिनट में 18 फैसलों को मंजूरी दी।
रिटेल में एफडीआई का किया बचाव
रिटेल में विदेशी निवेश को अनुमति देने के फैसले पर जनता को सम्बोधित करते हुए उन्होने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था के लिए यह जरूरी था कि हम रिटेल में विदेशी निवेश की अनुमति दें, जिससे देश में रोजगार के अवसर पैदा हो और देश की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो। बार-बार पेट्रोल के दाम बढ़ाने के विषय पर उन्होने यह कहकर सफाई दी कि अगर हम पेट्रोल के दाम न बढ़ाते तो हमारा घाटा दो लाख करोड़ हो जाता ऐसी स्थिति में हमें 1991 जैसे आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ता। अपने भाषणों में प्रधानमंत्री ने फैसलों के लिए तर्क दिये हैं। अब लगता है कि उन्हें जनता के बीच अपनी छवि की ठीक से जानकारी मिल गयी है और वह उसे बदलना चाहते हैं।
यह भी कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी अपने ऊपर लगे कमजोर प्रधानमंत्री के लेबल को हटाना चाहते हैं।












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