खुर्शीद के ट्रस्‍ट ने एटा में कोई विकलांग शिविर नहीं लगाया

Salman Khurshid
एटा। केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद के डा. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट की जांच शुरू होते ही हकीकत सामने आने लगी। एटा के जिला विकलांग कल्याण अधिकारी अजयबीर सिंह यादव ने अपने बयान में कहा कि 5 मई 2010 को एटा में ट्रस्ट द्वारा कोई कैंप नहीं लगाया गया।

कैम्प के विषय में ट्रस्ट द्वारा जो भी दस्तावेज पेश किए गए हैं उसमें अधिकारियों के हस्ताक्षर फर्जी हैं। दूसरी ओर सिद्धार्थनगर में विकलांगों की जो सूची ट्रस्ट द्वारा पेश की गयी उसमें लाभान्वित विकलांगों के पते गलत पाए गए। ज्ञात हो कि कानून मंत्री श्री खुर्शी ने उपरोक्त तिथि में एटा में कैम्प आयोजित किए जाने की बात कही थी।

यादव के बयान के बाद साबित हो गया कि ट्रस्ट द्वारा लगातार गड़बडिय़ां कर जनता का धन हड़प किया गया।

श्री यादव ने कहा कि ट्रस्ट द्वारा उनको इस तिथि पर कैंप आयोजित करने के जो दस्तावेज दिये गये हैं उनमें जांच के बाद तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी और तहसीलदार के हस्ताक्षर फर्जी पाए गये। उन्होंने कहा कि यदि उपरोक्त तिथि पर कैंप आयोजित किया जाता तो उनके विभाग को इसकी जानकारी अवश्य होती। उन्होंने आमतौर पर देखा जाता है कि विकलांगों के लिए आयोजित होने वाले शिविर के बारे विकलांग कल्याण विभाग को पूर्व में सूचित किया जाता है तथा विभाग के अधिकारी को या उनके प्रतिनिधि को शिविर में आमंत्रित भी किया जाता है। लेकिन 5 मई 2010 के विषय में कोई भी दस्तावेज विभाग में मौजूद नहीं है।

सूत्रों के अनुसार श्री खुर्शीद के डा. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा एटा में विकलांगों के लिए 5 मई 2010 को अलीगंज में एक कैंप आयोजित होने के दस्तावेजों की जांच करने के बाद पता चली हकीकत की रिपोर्ट मंत्रालय को भेज दी गयी है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट कर दिया गया कि एटा के तत्कालीन सीएमओ और तहसीलदार के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए।

जिला कल्याण अधिकारी ने बताया कि इस कैंप में 20 विकलांगों को उपकरण बाटने की बात कही गयी थी। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट द्वारा 10 सितम्बर 2011 को एटा जिले के वर्ना में एक कैंप लगाने के दस्तावेज भी भेजे गये हैं जिसमें 132 लाभाॢथयों को उपकरण देना दर्शाया गया है, इसकी भी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि सत्यापन के बाद ही इस कैंप के आयोजन के बारे में प्रामाणिक तौर पर कुछ कहा जा सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि अब तक उनके पास ई ओ डब्ल्यू के अधिकारी जांच करने नहीं आयें हैं, न ही अब तक कोई छापा ही पड़ा है। उधर सिद्धार्थनगर के बारे में पेश किए गए दस्तावेजों में भी गड़बड़ी मिली। सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट द्वारा जिले के उस्का बाजार कस्बे में 25 जनवरी 2010 को शिविर आयोजित करने की जानकारी प्रशासन को दी थी जिसमें हिस्सा लेने वाले 24 विकलांगों में से 5 को व्हृील चेयर, आठ को ट्राई सायकिल और बाई सायकिल, दो-दो को स्टिक और वाकर तथा सात को सुनने वाली मशन वितरित करने की बात कही गयी। सूची के सत्यापन के दौरान अभ्यर्थियों के पते सही नहीं मिल पा रहे हैं।

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