हरियाणा सरकार की सफाई से खेमका की बोलती बंद

अशोक खेमका खुद कई चैनलों पर जाकर बोल रहे थे कि उन्हें जान से मारने की धमकी मिल रही है और उन्हें ईमानदार होने की सजा मिल रही है लेकिन जैसे ही हरियाणा सरकार ने खेमका के तबादले पर अपना रूख साफ किया उसके बाद खेमका ने चुप्पी साध ली है और एबीपी न्यूज से कहा है कि हरियाणा सरकार की इस दलील से संतुष्ट है।
हरियाणा सरकार के सचिव ने प्रेस वार्ता करके कहा कि खेमका का वाड्रा प्रकरण से कुछ लेना-देना नहीं है। वाड्रा के जमीन का म्यूटेशन 15 अक्टूबर को खेमका ने रद्द किया है। जबकि पंजाब-हाईकोर्ट ने 11 अक्टूबर को खेमका के तबादले का आदेश दिया था। इसलिए उनका ट्रांसफर बीज निगम में कर दिया गया है। वाड्रा की बात इसमें कहां आ गयी है। यह जबरदस्ती मुद्दा बनाया जा रहा है।
आश्चर्य तो इस बात पर है कि खेमका का कहना है कि वो हरियाणा सरकार की इस दलील पर संतुष्ट हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर यह बात सही है तो खेमका ने बवाल क्यों खड़ा किया?
मालूम हो कि 15 अक्टूबर को आाईएएस अशोक खेमका ने डीएलएफ के जमीन का म्यूटेशन को रद्द करने का जो फैसला किया था। वो जमीन डीएलएफ ने वाड्रा से खरीदी थी। अब हरियाणा सरकार ने म्यूटेशन रद्द करने के खेमका के आदेश की जांच चार सदस्यों की समिति को सौंप दिया है। अरविंद केजरीवाल ने वाड्रा पर डीएलफ से बिना लोन जमीन खरीदने का आरोप लगाया है इसलिए जब खेमका ने वाड्रा के खिलाफ काम किया और उसका तबादला हो गया तो मामला गर्मा गया क्योंकि खेमका के हिसाब से उन्हें वाड्रा के खिलाफ काम करने की सजा मिली है।
इससे पहले खेमका का कहना था कि पंजाब-हाईकोर्ट ने उन्हें दो पदों के प्रभार से मुक्त करने का आदेश दिया था लेकिन राज्य सरकार ने उन्हें सभी पदों से मुक्त कर तबादला कर दिया। इसी से आहत उन्होंने अपन तबादले पर असंतोष हुआ था। लेकिन अब वो ही खेमका चुप है?












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