अपराध से ध्यान हटाने के लिये टैक्स का नाटक कर रही है सपा: भाजपा

पार्टी के राज्य मुख्यालय पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि राज्य की दिनो-दिन बिगड़ती कानून व्यवस्था से परेशान जनता का ध्यान हटाने के लिए सपा सरकार मंहगाई व डीजल, पेट्रोल के दामों में मूल्यवृद्धि के मुद्दे पर यूपीए सरकार के विरोध का नाटक कर जनता को धोखा दे रही है। उन्होंने कहा समाजवादी पार्टी ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि 'जिन वस्तुओं पर व्यापार कर की दरें दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं बिहार से ज्यादा है, इन दरों का पड़ोसी प्रान्तों के समकक्ष किया जायेगा'।
उन्होंने कहा कि लेकिन सत्ता में आते ही सपा सरकार अपने ही वादे को भूल गई। डीजल पर पंजाब में 9.07 प्रतिशत हरियाणा में 9.24 प्रतिशत, दिल्ली में 12.50 प्रतिशत, बिहार में 16.00 प्रतिशत बैट है। जबकि उ0प्र0 में डीजल पर 17.23 फीसदी की दर से वैट की वसूली की जा रही है। इसी तरह यूपी में 26.55 प्रतिशत की दर से पेट्रोल पर जनता को टैक्स देना पड़ रहा है। जबकि पड़ोसी राज्य दिल्ली में 20, हरियाणा में 21, पंजाब में 23.5 प्रतिशत फीसदी की दर से पेट्रोल पर वैट पड़ता है। ऐसे में यदि सपा सरकार को मंहगाई से दबी राज्य की जनता की चिन्ता थी तो उसने पेट्रोल व डीजल की कीमतों पर लगने वाले वैट की दरों में कमी कर जनता को राहत क्यों नही दे दी।
श्री पाठक ने राज्य सरकार द्वारा घरेलू इस्तेमाल में आने वाली चीजों जैसे एसी, फ्रिज, कॉस्मेटिक, मोबाइल, कोलड्रिंक्स, सीमेंट सहित कई अन्य वस्तुओं पर अतिरिक्त कर की दर को एक प्रतिशत से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत करने के फैसले की निन्दा की। भाजपा प्रवक्ता ने कर की दरें बढ़ाने को लेकर राज्य सरकार द्वारा दिये जा रहे तर्क कि पड़ोसी राज्यों के बराबर दरें की गई है, पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब राज्य सरकार ने पड़ोसी राज्यों की दरों का हवाला देकर आम जन के उपयोग में आने वाली वस्तुओं पर लगने वाले वैट की दरें बढ़ा दी, तो फिर पड़ोसी राज्यों की तरह ही उत्तर प्रदेश में पेट्रोल व डीजल पर लगने वाले वैट की दरों में कमी का फैसला क्यों नही कर रही है? भाजपा प्रवक्ता ने राज्य सरकार से मांग की कि वह डीजल व पेट्रोल के मुल्यों पर लगने वाले वैट की दरों में तत्काल कमी करते हुए पड़ोसी राज्यों के बराबर करने का निर्णय लेकर अपने वादे को निभाये। डीजल के मूल्य में कमी से किसानों को लाभ होगा। बसों के किराये तथा मालभाड़े में बढोत्तरी के कारण बढ़े कई अन्य चीजों के मूल्यों में भी कमी आयेगी। जिससे मंहगाई का दंश झेल रही आम जनता को राहत मिलेगी।












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