माइनिंग कंपनी ने राजनीतिक दलों को दिये 28 करोड़

अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले इस समूह ने बताया कि कंपनी ने वर्ष 2011-12 में राजनीतिक दलों को 20 लाख डॉलर की रकम दी, जबकि वर्ष 2009-10 में 36.6 लाख डॉलर की रकम दी गई थी। इस साल देश में आम चुनाव हुए थे। लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनी के प्रवक्ता ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वर्ष 2003-04 से अब तक समूह ने राजनीतिक दलों को 82.9 लाख डॉलर का चंदा दिया है।
वर्ष 2006-07 और 2008-09 में कंपनी ने इन दलों को कोई चंदा नहीं दिया। कंपनी ने कहा कि आम चुनाव से पहले कंपनी ने ट्रस्टों के जरिए या सीधे तौर पर राजनीतिक दलों को 20 लाख डॉलर की रकम दी। कंपनी के निदेशक मंडल का मानना है कि इससे भारत में राजनीतिक प्रक्रिया को मदद देने से लोकतांत्रिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। हालांकि कंपनी की ओर से दी गई इस मोटी रकम को लेकर ब्रिटेन स्थित शेयरधारक सलाहकार समूह पर्क ने कंपनी की कड़ी आलोचना की है।
वैसे आपको बता दें कि इस प्रकार की कंपनियां सभी दलों को संतुष्ट करने का प्रयास करती हैं। चाहे वह भाजपा हो या कांग्रेस या फिर सीपीआई ही क्यों न हो। ये कंपनियां राजनीतिक लाभ के लिए समय समय पर राजनीतिक दलों को चंदा देती रहती हैं। एक सूत्र ने बताया कि जो राजनीतिक दल सत्ता में होता है उसे यह कंपनियां सबसे ज्यादा चंदा देती हैं क्योंकि उनसे वह अपनी मुफीद के नियम बनवाकर लाभ लेने की कोशिश करती हैं।
बताया जा रहा है कि इस दस सालों में कांग्रेस को सबसे ज्यादा उद्योगिक घरानों से चंदा मिला है। दूसरे नंबर पर भाजपा है क्योंकि कंपनियों को लगता है कि यदि कांग्रेस सत्ता से हटी तो भाजपा का ही नंबर आएगा इसलिए वह भाजपा को भी उतनी ही तवव्जो देती हैं जितना कांग्रेस को। इस समय इन दोनों पार्टियों के खजाने में 1000 करोड़ रुपये पड़े हैं।












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