अगला पीएम न कांग्रेस का होगा न भाजपा का: आडवाणी

भाजपा नेता लालकृष्णा आडवाणी ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि 2014 में काग्रेस या भाजपा का प्रधानमंत्री बनना नामुमकिन है। क्योंकि उस समय दोनों में से किसी को भी बहुमत नहीं मिलेगा। आडवाणी ने लिखा है कि कांग्रेस को जहां महज 100 सीट के भीतर ही संतोष करना होगा वहीं भाजपा भी बहुमत से काफी दूर रहेगी। ऐसी स्थिति में कांग्रेस या भाजपा को किसी तीसरे व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाना पड़ेगा।
आडवाणी ने ब्लाग में तीसरे मोर्च की सरकार बनने की संभावना से इंकार किया है। उन्होंने लिखा है कि तीसरा मोर्चा सरकार बनाने की स्थिति में नहीं होगा। हालांकि उन्होंने कहा कि तीसरा मोर्चा बन सकता है और उसी में से किसी या अन्य दल के नेता को पीएम बनाना पड़ेगा। आडवाणी ने ब्लाग में पीएम के रूप में चौधरी चरण सिंह, चंद्रशेखर, एचडी देवगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल तथा भाजपा समर्थित सरकार में वीपी सिंह के प्रधानमंत्री होने का उदाहरण पेश किया है। आडवाणी ने इससे पहले यह भी लिखा था कि, ‘पिछले ढाई दशक में देश में राष्ट्रीय राजनीति का जो स्वरूप बना है उसके मुताबिक नई दिल्ली में ऐसी सरकार बनना व्यवहारिक रूप से असंभव है जिसे कांग्रेस या भाजपा का समर्थन नहीं हो। इसलिए तीसरे मोर्चे की सरकार की संभावना खारिज की जा सकती है।'
आडवाणी ने अपनी यह राय ऐसे समय में दी है जब देश में भाजपा की ओर से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर बहस छिड़ी हुई है। राजग के कार्यकारी अध्यक्ष ने अपनी यह राय सरकार के दो वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों के विचारों का हवाला देते हुए दी। आडवाणी ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा निवर्तमान राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के सम्मान में दिए गए रात्रिभोज के दौरान दोनों मंत्रियों ने अनौपचारिक बातचीत में यह राय दी थी कि 16वें लोकसभा चुनाव में न तो कांग्रेस और न ही भाजपा सरकार बनाने के लिहाज से स्पष्ट बहुमत हासिल करने के लिए गठबंधन बना पाएंगे और 2013 या 2014 जब भी चुनाव होंगे तीसरे मोर्चे की सरकार बन सकती है।
आडवाणी के अनुसार उन्होंने सरकार के मंत्रियों की राय के विपरीत अपना विचार रखते हुए कहा, ‘मैं आपकी चिंता समझता हूं लेकिन मैं इससे इत्तेफाक नहीं रखता। मेरी राय अलग है।' आडवाणी ने कांग्रेस और संप्रग सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि देश में जब भी कांग्रेस या भाजपा का प्रधानमंत्री रहा है तभी स्थिरता रही है लेकिन दुर्भाग्य से 2004 के बाद से संप्रग का शासन बहुत खराब रहा है।












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