तब जुलाई के महीने में दिल्ली का तापमान होगा शून्य
बेंगलूरु। दिल्ली के मौसम विभाग के आंकड़े कहते हैं कि 2012 से पहले जुलाई के महीने में दिल्ली इतनी ठंडी कभी नहीं हुई। दिल्ली का तापमान 26 डिग्री तक चला गया। अगर हम यह कहें कि भविष्य में जुलाई के महीने में दिल्ली का तापमान शून्य को छुएगा तो शायद आपको यकीन नहीं होगा, लेकिन भूवैज्ञानिकों की मानें तो यह बिलकुल सत्य है।
ग्रीनलैंड पर40 फीसदी बर्फ पिघलने की खबर आयी तो दुनिया भर के वैज्ञानिकाकें में हड़कंप मच गया। पर सेंटर ऑफ एडवांस स्टडी इन जियोलॉजी, लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. ध्रुव सेन सिंह ने कहा है कि इस बात को लेकर पैनिक होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि हो सकता है पृथ्वी अपने दूसरे चक्र में प्रवेश कर रही हो। वनइंडिया से खास बातचीत में प्रो. ध्रुव सेन ने कहा कि पृथ्वी पर भूगर्भीय गतिविधियों में उतार-चढ़ाव होना स्वाभाविक है। अरबों वर्ष पूर्व पृथ्वी बर्फ के गोले के समान ठंडी थी। फिर उसने गर्म होने के चक्र में प्रवेश किया और धीरे-धीरे आग के गोले में परिवर्तित हो गई। उसके बाद पृथ्वी फिर ठंडी हुई और फिर गर्म। यह चक्र चलता रहा और अभी भी जारी है।

अंटाक्टिका पर पहली बार जाने वाले भारतीय समूह के सदस्य रहे प्रो ध्रुव सेन कहते हैं कि भूगर्भीय अध्ययन के मुताबिक वर्तमान में पृथ्वी का चक्र गर्म होने की ओर है। यानी अगला चक्र जो शुरू होगा उसमें पृथ्वी ठंडी होना शुरू हो जायेगी। यह कब से होगा, यह कोई नहीं बता सकता है। यह चक्र शुरू हो चुका है या नहीं, इस बात को भी अभी दुनिया के वैज्ञानिक सिद्ध नहीं कर पाये हैं।
प्रो. ध्रुव सेन का कहना है कि अगर यह चक्र शुरू हो चुका है, तो ग्रीन लैंड में जो बर्फ पिघल गई है, वो फिर से आ जायेगी। यानी समुद्री तट पर बसे शहरों पर खतरा टल जायेगा। यानी जिसे हम ग्लोबल वॉर्मिंग कह कर हंगामा कर रहे हैं, वो सब किनारे लग जायेगा और तब मई-जून और जुलाई के महीने में जिन स्थानों पर 40 से 50 डिग्री तक तापमान रहता है, वहां तापमान शून्य या उसके नीचे पहुंच जायेगा। लेकिन हां ऐसी स्थिति तक पहुंचने में भी पृथ्वी को सैंकड़ों या फिर लाखों वर्ष लग सकते हैं।
डा. सिंह के मुताबिक मौसम में ऐसे बदलाव हुए तो तमाम जीव-जंतुओं व पर्यावरण पर इसका प्रभाव निश्चित तौर पर पड़ेगा। उसमें मानवजाति भी हो सकती है।












Click it and Unblock the Notifications