दीपड़ा दरवाजा नरसंहार: 22 लोग दोषी करार, 61 बरी

सभी दोषियों को सजा बाद में सुनाई जायेगी। अदालत ने इस मामले में 10 आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया जबकि शेष अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ दिया गया है। गुजरात में 2002 के दंगों के दौरान उग्र भीड़ ने मेहसाणा जिले के विसनगर शहर के दीपड़ा दरवाजा इलाके में 28 फरवरी 2002 को एक ही परिवार के 11 सदस्यों की हत्या कर दी थी। इस घटना में मरने वालों में दो बच्चे और 65 साल की एक महिला भी शामिल थी। इस मामले में शुरूआत में तीन महिलाओं समेत 83 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे लेकिन बाद में अदालत ने शिकायतकर्ता मोहम्मद इकबाल बलूच के आवेदन को मंजूर कर लिया और भाजपा के पूर्व विधायक प्रह्लाद गोसा और विसनगर शहर के पूर्व पुलिस निरीक्षक एम के पटेल को भी आरोपी बनाया।
इसके साथ ही आरोपियों की कुल संख्या 85 हो गई थी। हालांकि, अदालत ने जिन आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे उनमें से एक अपराध के समय नाबालिग था। इस नाबालिग आरोपी का मामला किशोर अदालत में भेज दिया गया था जबकि एक अन्य आरोपी की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत ने 167 गवाहों का परीक्षण किया। उनमें से 12 मुख्य गवाह थे। दीपड़ा दरवाजा मामले में आरोपियों में तीन महिलाएं भी शामिल थीं। उनपर हत्या और अन्य अपराधों का आरोप लगाया गया था लेकिन अदालत ने सभी को बरी कर दिया। इससे पहले 83 आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 307 समेत अन्य आरोप लगाए गए थे। गोधरा ट्रेन अग्निकांड समेत दीपड़ा दरवाजा उन नौ मामलों में से एक है जिसकी उच्चतम न्यायालय ने एसआईटी को जांच करने का आदेश दिया था।












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