पाकिस्तानी टीवी शो में मुसलमान बनने के बाद सुनील ने कहा, यह ड्रामा था

Hindu boy converts to Islam on TV in Pakistan
दिल्ली (ब्यूरो)। रमजान के महीने में पाकिस्तान के एक टीवी चैनल पर एक हिंदू बच्चे को इस्लाम धर्म अपनाने का लाइव प्रसारण किया है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि एक बार फिर पाकिस्तान में हिंदुओं को जबरन हिंदू बनाने का सिलसिला शुरू हो सकता है। इसे वहां के टीवी चैनल भी बढ़ावा दे रहे हैं। हालांकि बाद में मुसलमान बने हिंदू युवक सुनील ने कहा है यह दुखद ड्रामा था। हालांकि सुनील की बातों से साफ नहीं है कि वह क्या कहना चाहता है।

वह दुखद ड्रामा से क्या कहना चाहता है। ऐसा लगता है सुनील कहना चाहता है कि यह मजबूरी में लिया गया फैसला है। एआरवाई टीवी के शो सुनील को मुसलमान बनते हुए दिखाया गया। बाद में उसका नाम मोहम्मद अब्दुल्ला कर दिया गया। सुनील अंसार ट्रस्ट में काम करता है। अंसार ट्रस्ट के मालिक ने अंसार बर्नी ने कहा है कि सुनील ने उसे बताया है कि यह दुखद ड्रामा था। बर्नी ने कहा है कि वह एंकर माया खान के खिलाफ मुकदमा करने जा रहे हैं। १९४७ में आजादी के बाद लाहौर में इस्लामीकरण का भयावह दौर चला था। उस दौर में कट्टरपंथी तलवार लेकर हर हिंदू और सिख के घर पर जाते थे कहते थें कि मुसलमान बनों या तलवार से कत्ल होने के लिए तैयार हो जाओ। नतीजा यह हुआ कि लाहौर शहर से हिंदुओं और सिखों का अंत हो गया। डर से लाखों हिंदू और सिख मुसलमान बन गए। एक बार फिर पाकिस्तान उसी दौर में जाता हुआ दिख रहा है। पाकिस्तान का प्रगतिशील अखबार डान ने अपने संपादकीय में लिखा है कि देश की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया किसी भी चीज को चटपटा बनाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। हद हो गई कि अब वह धर्म के नाम पर खिलवाड़ करने लगी है। हिंदुओं की भावनाओं को मजाक बनाया जाने लगा है।

मंगलवार को टीवी के इस शो के दौरान एक इमाम को एक हिंदू लड़के सुनील को इस्लाम धर्म स्वीकार करते हुए लाइव दिखाया गया था। शो के दौरान ही स्टूडियो में बैठे हुए दर्शकों से इस लड़के के लिए नए नाम सुझाने के लिए भी कहा गया। जिस उत्साह और प्रसन्नता के साथ इस धर्मातरण को दर्शकों ने सराहा, वह हैरत करनेवाला है। अगर भारत में किसी चैनल ने किसी मुसलमान को हिंदू धरम स्वीकार करते दिखा देता तो सारे देश में दंगा हो जाता। डान ने लिखा है कि यह घटना इस बात की एक और मिसाल है कि अब मीडिया ने अपने व्यावसायिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए नैतिक मूल्यों, वैचारिक खुलापन और सामान्य ज्ञान को परे रख दिया है। डान ने अफसोस जाहिर करते हुए लिखा है कि जिस देश में अल्पसंख्यकों से कई मामलों में पहले ही दोयम दर्जे के नागरिकों जैसा बर्ताव किया जाता है, इस घटना के बाद वे देश की मुख्यधारा से और भी दूर हो जाएंगे। उम्मीद करनी चाहिए पाकिस्तान सेकुलर देशों से सबक लेगा और दूसरे मजहब के मानने वाले लोगों को भी जिंदा रहने देगा।

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