मॉनसून सत्र में भी नहीं आ पायेगा लोकपाल बिल!

नयी दिल्ली। अन्‍ना हजारे और उनकी टीम की लाख कोशिशों के बावजूद लोकपाल बिल संसद भवन के गलियारों से बाहर नहीं निकल पा रहा है। राज्‍यसभा समिति की शर्तों को देखें तो अभी आपको अभी से लगने लगेगा कि मॉनसून सत्र में भी इस बिल का आना मुश्किल है।

ऐसा इसलिये क्‍योंकि लोकपाल विधेयक पर अध्ययन कर रही राज्यसभा की प्रवर समिति ने आज कहा कि विधेयक को लेकर आने वाले सभी सुझावों पर विचार के बाद ही इसे संसद में पेश किया जाएगा, जिससे संकेत मिलता है कि सुझावों पर विचार प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर रिपोर्ट को मानसून सत्र में पेश होने से टाला जा सकता है।

समिति की रिपोर्ट संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश करने की संभावना के सवाल पर इसके अध्यक्ष और कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कहा, हमें सदन की ओर से जो आदेश मिला है उसके मुताबिक तो हमें मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह से पहले रिपोर्ट पेश करनी चाहिए और हमारा प्रयास भी ऐसा रहेगा।

उन्होंने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा, लेकिन यह :रिपोर्ट को पेश करना: इस बात पर निर्भर करेगा कि जितने संगठन और लोगों ने अपने सुझाव रखने की इच्छा जताई है उन सभी की राय पर विचार किया जाए।

इससे पहले लोकपाल विधेयक को आगामी मानसून सत्र में लाये जाने के सवाल पर कार्मिक, पेंशन राज्यमंत्री वी नारायणसामी ने कहा था, मुझे ऐसी उम्मीद है। समिति फैसला करेगी। हम समिति पर शर्तें नहीं थोप सकते। टीम अन्ना द्वारा समिति को पत्र भेजकर उसकी जरूरत पर ही सवाल उठाये जाने की खबरों पर चतुर्वेदी ने कहा, हमें पत्र मिला है।समिति सदस्यों के साथ इस पर विचार करेगी और तब प्रतिक्रिया देगी।

गौरतलब है कि टीम अन्ना ने समिति को पत्र लिखकर सवाल उठाया है कि आखिर एक साल के भीतर इस विधेयक को लेकर तीसरी बार किसी संसदीय समिति की जरूरत क्यों पड़ी है। टीम अन्ना ने कहा है कि 13 हजार लोग संसद की एक समिति को सुझाव दे चुके हैं तो यही प्रक्रिया दोहराने की क्या जरूरत है। इन्हीं सुझावों पर विचार किया जा सकता है।

चतुर्वेदी ने कहा कि समिति ने अखबारों में सार्वजनिक सूचना देकर आम नागरिकों से विधेयक के संबंध में सुझाव मांगे हैं। इन पर विचार चल रहा है। कुछ लोगों ने लिखित में सुझाव भेजे हैं और कुछ पक्ष समिति के सामने सुझाव पेश करना चाहते हैं। चतुर्वेदी ने कहा कि संसद ने समिति को यह बताने की जिम्मेदारी दी है कि लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक, 2011 पर मतभेदों को लेकर किस तरह से आम राय बन सकती है।

उन्होंने कहा, समिति को सभी सदस्यों और लोगों के सुझावों पर विचार कर यह पता लगाना है कि विधेयक पर मतभेदों को लेकर क्या कोई आमराय बन सकती है और यदि बन सकती है तो क्या रास्ता निकल सकता है।

चतुर्वेदी ने कहा कि समिति के सदस्यों को इसी बात पर विचार करना है कि संसद में पेश किये जा चुके विधेयक में क्या संशोधन किये जा सकते हैं और वे सभी पक्षों को मंजूर हैं या नहीं।

लोकपाल पर गत महीने गठित समिति की अब तक चार बैठकें हो चुकी हैं और आगामी बैठक 25 जुलाई को है। लोकपाल विधेयक पर कल नारायणसामी ने कहा था, सरकार इसे लेकर प्रतिबद्ध है। इसलिए हम पिछली बार विधेयक लाये।

हम इसे पारित कराना चाहते थे। सीबीआई को लेकर कुछ मतभेद थे। उसके बाद प्रवर समिति का मुद्दा मुख्य था। तीन से चार मतभेद थे। इनमें नरमी आई है। क्या सीबीआई लोकपाल के अंदर रहेगी, इस पर मंत्री ने कहा, समिति फैसला करेगी। लोकपाल विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है लेकिन राज्यसभा में इस पर चर्चा अधूरी रह गयी थी।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+