सपा के मंत्री व विधायक नहीं लड़ेगे लोकसभा चुनाव

पर्यवेक्षक उन क्षेत्रों में नियुक्त किए गए जहां गत लोकसभा चुनाव में पार्टी हार गयी थी। बैठक में शामिल नेताओं के मुताबिक पर्यवेक्षकों से कहा गया है कि वे संसदीय क्षेत्रों में जाकर लोगों से बात करें तथा उनका रूख जानने का प्रयास करें। वहां के पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलें और स्थानीय मुद्दों के साथ आगामी 30 जुलाई तक पार्टी नेतृत्व को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपे।
बाकी सीटों पर भी पार्टी इसी तरह बाद में पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करेगी। संसदीय क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों के चयन और टिकट वितरण में पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट की अहम भूमिका होगी। बैठक में शामिल एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक श्री यादव ने लोक सभा में कम से कम 50 सीटें जीतने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने सभी नेताओं को अपने- अपने क्षेत्रों में जाकर अखिलेश सरकार की उपलब्धियों का प्रचार करने के भी निर्देश दिये।
इस लोकसभा चुनाव की खास बात यह होगी कि मंत्री या विधायक को लोकसभा चुनाव लडऩे की अनुमति नहीं दी जायेगी। दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री व बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती विधानसभा चुनाव में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद अब पार्टी संगठन को मजबूत करने तथा उसमें आमूल चूल परिवर्तन की तैयारियों में जुट गयी हैं।
लोकसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर वह प्रदेश के संगठनात्मक ढांचे में फेरबदल कर संगठन को और सक्रिय करेंगी। सोलहवीं विधानसभा चुनाव में बसपा को मात्र 80 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। पांच साल सत्ता में रही बसपा को इस पराजय से करारा झटका लगा था। सुश्री मायावती ने पार्टी के जिम्मेदार नेताओं को निकाय चुनाव में स्थानीय स्तर पर प्रभावी उम्मीदवार को समर्थन का अधिकार दे दिया था। निकाय चुनाव में पार्टी समर्थित इलाहाबाद में मेयर समेत कई नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों के अध्यक्ष पद पर विजय मिली है।












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