हायर एजुकेशन बिल को लेकर देशभर के वकील हड़ताल पर
दिल्ली (ब्यूरो)। देशभर के करीब 17 लाख वकील आज औऱ कल न्यायिक कार्यों से विरत रहेंगे। वकील केंद्र सरकार के उस विधेयक के खिलाफ है जिसमें कानूनी शिक्षा पर नकेल कसने की तैयारी है। वकीलों का मानना है कि प्रस्तावित विधेयक के माध्यम से सरकार विधि के क्षेत्र में अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहती है। यह वकालत के पेशे की स्वतंत्रता पर हमला है। वकीलों का कहना है कि किसी भी स्थिति में ये विधेयक स्वीकार नहीं किया जा सकता। जो प्रणाली अब तक चल रही है, उसकी कमियों को खोजा जाना चाहिए।
वकीलों के सर्वोच्च संगठन बार कौंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन मिश्रा ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक के विरोध में राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान किया था। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 11 और 12 जुलाई को दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल कर उच्च शिक्षा और शोध विधेयक पर अपना विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है। इस दो दिवसीय हड़ताल में देश के अलग- अलग राज्यों के लाखों वकीलों के हिस्सा लेने की संभावना है।
मनन कुमार मिश्रा ने बताया कि उच्च शिक्षा और शोध विधेयक 2011 के विरोध में भारत के लगभग 17 लाख अधिवक्ता अपने काम पर नही जाएंगे। हालांकि इस हड़ताल में सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के वकील शामिल नही होंगे, लेकिन वो भी विरोध स्वरुप सफेद पट्टी बांध कर काम करेंगे।
उच्च शिक्षा और शोध विधेयक 2011
मनन मिश्रा का कहना है, "मानव संसाधन विकास मंत्रालय कुछ ऐसे विधेयक ला रहा है जिसमें सबसे महत्वपूर्ण है उच्च शिक्षा और शोध विधेयक 2011। इस विधेयक के जरिए पूरी शिक्षा प्रणाली को सरकार अपने द्वारा नामांकित किए कुछ प्रतिनिधियों को सौपने जा रही है, जिसका बार काउंसिल विरोध करती है।"
बार काउंसिल ऑफ इंडिया का कहना है कि ये विधेयक उनके अधिकारों को छीनने और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के हाथों में उन्हें सौंपने का प्रयास है। मनन मिश्रा ने कहा कि बार काउंसिल की मांग है कि इस विधेयक से कानूनी शिक्षा और ऐडवोकेट एक्ट को अलग कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि बार काउंसिल का अधिकार रहा है कि उसके पास एक उच्च स्तरीय समिति होती है जिसमें सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज, मुख्य न्यायाधीश, राज्यों के न्यायाधीश और शिक्षाविद होते हैं जो फैसले करते हैं। उनके अनुसार अब इनकी जगह सरकार के नामित चंद लोगों को रखे जाने का प्रस्ताव है।












Click it and Unblock the Notifications