विधायक फंड से कार नहीं तो क्‍या, लैपटॉप-हैंडीकैम तो है

Chief minister of Uttar Pradesh Akhilesh Yadav
देखना सुनना व सच कहना जिन्हें भाता नहीं, कुर्सियों पर फिर वही बापू के बंदर आ गये।
किसी महान शायर ने यूपी की राजनीति पर यूं ही नहीं यह कटाक्ष किया था। आज यूपी की राजनीति कुछ ऐसी ही है क्‍योंकि जहां विकास के नाम पर किसी को कुछ ना तो दिखाई देता है और ना ही कुछ सुनाई। मंगलवार को युवा मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव के विधायकों को विधायक फंड से 20 लाख की लग्‍जरी कार खरीदने की अनुमति दे देना इस बात पर पुख्‍ता मुहर लगा रहा है। खैर ये तो बात और चली गई, अखिलेश ने अपना फैसला भी बदल दिया मगर उन शासनादेशों का क्‍या जो चुपचाप पास करा लिये गये।

जी हां अखिलेश ने कार के लिये फंड से 20 लाख रुपये खर्च करने की बात सदन में उठाई तो बात जग जाहिर हो गई और हंगामा शुरु हो गया वर्ना विधायक फंड से लैपटॉप और हैंडीकैम तक खरीदने के शासनादेश गुपचुप तरीके से हो चुके हैं। आप सुनकर यह चौक जायेंगे कि यूपी देश का एक मात्र राज्‍य है जहां विधायकों को किसी सरकारी निधि को अपने अय्याशी पर खर्च करने की इजाजत है। बात 1998-99 की है जब क्षेत्रों के संतुलित विकास की अवधारणा पर विधायक निधि से विधायकों के निजी उपयोग के लिये लैपटाप खरीदने की अनुमति का शासनादेश 2002 में करा लिया गया।

इस शासनादेश के पीछे यह तर्क दिया गया था कि लैपटाप विधायकों के लिये बहुत जरुरी हो गया है। शासनादेश में कहा गया था कि 25 हजार रुपये तक की कीमत का लैपटाप निधि से विधायक खरीद सकते हैं। कार्यकाल पूरा होने के बाद विधायकों को यह लैपटाप वापस करना होगा अगर वह वापस ना करना चाहें तो उन्‍हें प्रतिवर्ष घटती कीमत के आधार पर उसका मूल्यांकन कर शेष रकम सरकार को चुका कर उसे खरीद सकते हैं।

अगर वो ऐसा भी नही करते है तो वह राशि उनके पेंशन से वसूल की जायेगी। पेंशन से वसूली की बात पर हंगामा शुरु हो गया और विरोध के बाद सरकार को सम्बंधित विधायकों की पेंशन से कटौती का प्रस्ताव अग्रिम आदेशों तक रोकना पड़ा और जो अभी भी प्रभावी है। फिर जो नये विधायक आये उन्‍हें अपना लैपटाप पुराना लगने लगा। चूंकि पहले यह आदेश था कि लैपटाप सिर्फ एक बार ही खरीदी जा सकेगी ऐसे में वर्ष 2008 में दूसरा शासनादेश जारी हो गया। इस शासनादेश में कहा गया कि लैपटाप का डिप्रिसियेशन मूल्य जमाकर विधायकों को नए लैपटाप के लिए एक लाख 25 हजार रुपये की धनराशि स्वीकृति की जा सकेगी।

लैपटाप के बाद विधायकों को सोनी हैंडीकैम भाने लगा। दबाव बना तो गुपचुप तरीके से तीन अक्टूबर 2008 को एक और शासनादेश जारी हो गया, जिसमें कहा गया माननीय विधायक गण द्वारा सोनी हैंडीकैम की मांग की जाती है। वर्तमान में माननीय विधायकों के लिए हैंडीकैम की अधिक आवश्यकता और वेबकैम की कोई खास उपयोगिता नहीं। हैंडीकैम को यूएसबी के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है, जिससे यह वेब कैमरा का रूप ले सकता है। अत: माननीय विधायक गण की मांग पर उन्हें सोनी हैंडीकैम उपलब्ध कराया जा सकता है।

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