यदि जरूरत पड़ी तो यूपीए छोड़ देंगी ममता बनर्जी

कलाम के निर्णय के बाद तृणमूल अब अपने रुख को लेकर फंस गई है। संभावना है कि इस झंझावात के वह सरकार से भी अलग हो जाए और उसके मंत्री सरकार से इस्तीफे भी दे दें। हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने ऐसी किसी संभावना से इंकार किया है औऱ कहा कि तृणमूल कांग्रेस संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार की सहयोगी बनी रहेगी। यदि कांग्रेस चाहे तो उनकी पार्टी को वह निकाल बाहर सकती है। हालांकि उन्होंने कहा कि अगर ममता बनर्जी कहेंगी तो टीएमसी के सभी मंत्री तुरंत इस्तीफा दे देंगे।
तृणमूल कांग्रेस के सांसदों व विधायकों की एक बैठक के बाद सुदीप बंदोपाध्याय ने संवाददाताओं से कहा कि ऐसी खबरें चल रही हैं कि तृणमूल कांग्रेस के मंत्रियों ने केंद्र सरकार से इस्तीफा दे दिया है और अपने इस्तीफे ममता को सौंप दिए हैं। इन खबरों में सच्चाई नहीं है। हमारा इरादा सरकार गिराने का नहीं है। हां, हम उसके लिए मुश्किल नहीं बनेंगे। बंदोपाध्याय ने कहा कि हमारे सांसद इस्तीफा देने को मानसिक रूप से तैयार हैं। राष्ट्रपति चुनाव पर उन्होंने कहा कि हम अभी भी चाहते हैं कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम देश के राष्ट्रपति बनें। राष्ट्रपति चुनाव में अभी भी समय बचा है। हम उन्हें मनाने की कोशिश करेंगे और हम सही समय पर सही फैसला लेंगे।
पर एक सूत्र ने बताया कि तृणमूल कोटे के मंत्री अपने अपने दफ्तर से फाइलें समेटने लगे हैं यानी जरूरत पड़ी तो वे इस्तीफा देकर पूरी तरफ से सरकार से अलग हो सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि कल सुबह से ही मुकुल राय के दफ्तर से कई फाइलें हटाई गईं उसमें से कुछ फाइलें ऐसी थी जिसके बारे में कुछ लोगों को ही जानकारी है। हालांकि फाइलों के बारे में सूत्रों ने बताने से इंकार कर दिया।
उधर, ममता बनर्जी कल मुलायम पर हमला करने से नहीं रोक सकीं। उन्होंने मुलायम सिंह पर फेसबुक के सहारे उनपर हमला बोला। ममता ने लिखा है-कलाम साहब, आपने हमारे मन और आत्मा को छुआ है। मैंने आपका बयान देखा और सुना। आप चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। इस खबर से हम सभी को गहरी चोट लगी है। आप जैसे लोग ही राष्ट्रपति पद के सही हकदार हैं, जो उच्च कार्यालय और आम लोगों के बीच का अंतर पाट सकते हैं। तीन-चार दिनों का दर्दनाक समय गुजारने के बाद ऐसा लग रहा है कि कुछ राजनीतिक दल लोगों को बड़ी कठिन परिस्थिति में झोंक दे रहे हैं।
ऐसी स्थिति में देश के युवाओं के लिए अखंडता और उच्चतम नैतिकता की आप प्रेरणा हैं। ममता ने लिखा है, यह काफी मुश्किल समय है, गंभीर तनाव के बीच लोग राजनीतिक वर्ग और संस्थाओं पर विश्वास कर पा रहे हैं। राजनीतिक संस्थाओं में जो बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और छलपूर्ण व्यवहार हो रहा है, उससे आम लोगों में राजनेताओं के प्रति अविश्वास बढ़ रहा है। कुछ ऐसे राजनेता हैं जो व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए सारी नैतिकता को त्याग दे रहे हैं। मैं अपने देश के लोगों की अदम्य इच्छाशक्ति में अडिग विश्वास रखती हूं और वे ही भारतीय राजनीति को शुद्ध कर ईमानदार मूल्यों और नैतिकता को वापस लाएंगे। उन्होंने देशवासी और खास कर युवा वर्गो से अपील की है कि वे भ्रष्टाचार, षड्यंत्र और निकोलो मेकियावेली की कूटनीति की तर्ज पर राजनीतिक करने वालों के खिलाफ लामबंद हों।












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