राष्ट्रपति बनने से पहले खुद को पाक साबित तो कर लें प्रणब: केजरीवाल

Team Anna member Arvind Kejriwal
दिल्‍ली। राष्ट्रपति चुनाव में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के उम्मीदवार वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी पर टीम अन्ना हजारे के तीखे हमले बरकरार हैं। टीम अन्ना के प्रमुख सदस्य अरविंद केजरीवाल ने आज जोर देकर कहा कि मुखर्जी को देश के शीर्ष संवैधानिक पद पर पहुंचने से पहले अपने खिलाफ लगे संगीन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच से गुजरना चाहिये। वरना उनके दामन पर हमेंशा के लिये दाग बना रहेगा।

उन्‍होंने नेवी वॉर रूम लीक प्रकरण, कथित चावल निर्यात घोटाला और स्कॉर्पीन पनडुब्बी सौदे का मामला उठाते हुए इंदौर प्रेस क्लब में कहा, अगर मुखर्जी तीनों मामलों में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच से गुजरे बगैर राष्ट्रपति की कुर्सी तक पहुंच गये, तो बाद में उनके खिलाफ जांच की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी, क्योंकि देश का प्रथम नागरिक बनने पर उन्हें संविधान के तहत छूट हासिल हो जायेगी।

केजरीवाल ने कहा, अगर मुखर्जी इन मामलों में जांच से गुजरने के बाद पाक-साफ साबित होकर राष्ट्रपति बने तो देश उन पर गर्व करेगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा और उनके दामन पर हमेशा दाग बना रहेगा। हालांकि, उन्होंने बताया, हमें कल शाम मुखर्जी का एक लंबा पत्र मिला, जिसमें उन्होंने हमारे सारे आरोपों को खारिज किया है। हम इस पत्र का विस्तृत जवाब कल या परसों तक उन्हें भेज देंगे। बहरहाल, केजरीवाल का कहना है कि मुखर्जी ने अपने पत्र में इस आरोप का कोई जवाब नहीं दिया है कि उन्होंने रक्षा मंत्री रहते हुए नेवी वॉर रूम लीक प्रकरण में तीन आरोपियों को बचाने की कोशिश क्यों की।

केजरीवाल ने कहा कि सीबीआई ने इस मामले की जांच के बाद अदालत में पेश आरोप पत्र में कहा है कि नौसेना के युद्ध कक्ष से गायब हुए पेन ड्राइव में भारत की सुरक्षा से जुड़ी अहम जानकारी थी और इसके लीक होने से देश की सुरक्षा को खतरा है। लेकिन मुखर्जी ने फरवरी 2006 में करण थापर को दिये टेलीविजन साक्षात्कार में बार-बार पूछे जाने पर मामले की जांच की जरूरत से इंकार करते हुए कहा था कि गायब हुए पेन ड्राइव में देश की सुरक्षा से जुड़ी संगीन जानकारी नहीं थी, बल्कि कुछ व्यावसायिक जानकारी थी।

केजरीवाल ने संप्रग की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को स्कार्पीन पनडुब्बी के सौदे में कथित गड़बडि़यों के मामले में भी घेरा। उन्होंने कहा, मुखर्जी ने हमें कल भेजे पत्र में कहा है कि सीबीआई ने इस प्रकरण की प्राथमिक जांच के आधार पर पाया है कि इस सिलसिले में कोई मामला नहीं बनता। हम पहले ही कह चुके हैं कि सीबीआई उनके पक्ष में ही रिपोर्ट देगी, क्योंकि वह केंद्र सरकार की मातहत जांच एजेंसी है। टीम अन्ना के प्रमुख सदस्य ने मुखर्जी पर तीसरा निशाना वर्ष 2008 के कथित चावल निर्यात घोटाले को लेकर साधा।

उन्होंने कहा कि घाना सरकार की छानबीन में इस मामले में गड़बड़ी की पुष्टि के बाद अफ्रीकी गणराज्य ने भारत को पत्र लिखकर कहा था कि भारतीय विदेश मंत्री और वाणिज्य मंत्री की जांच करायी जाये। उस वक्त मुखर्जी देश के विदेश मंत्री थे। केजरीवाल ने कहा कि घाना सरकार के इस पत्र से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की किरकिरी हुई। इस मामले में संसद में हंगामा मचने के बाद संयुक्त सचिव स्तर के अफसर से मामले की जांच के नाम पर देश को कथित रूप से बेवकूफ बनाया गया।

उन्होंने दोहराया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और मुखर्जी सहित 15 केंद्रीय मंत्रियों पर अलग-अलग मामलों में भ्रष्टाचार के संगीन आरोप हैं। केजरीवाल ने कहा, अगर प्रधानमंत्री को भरोसा है कि उन्होंने और उनके मंत्रियों ने कोई भ्रष्टाचार नहीं किया है तो वह स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच से क्यों डर रहे हैं। इससे लगता है कि दाल में कुछ काला है। उन्होंने कहा, हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री समेत केंद्र सरकार के 15 मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच किसी न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली ऐसी स्वतंत्र और निष्पक्ष समिति करे, जिस पर देश को भरोसा हो।

टीम अन्ना के प्रमुख सदस्य ने कहा, सीबीआई सीधे तौर पर केंद्र सरकार की मातहत जांच एजेंसी है। लिहाजा हम सपने में नहीं सोच सकते हैं कि वह किसी मामले में जांच के बाद यह कहेगी कि प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार किया। केजरीवाल ने कटाक्ष किया, अगर पुलिस चोरों की मातहत होगी तो वह चोरों को कैसे पकड़ेगी। उन्होंने केंद्र को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि सरकार टीम अन्ना के सदस्यों पर महज आरोप लगाने के बजाय विशेष जांच दल गठित करे और जांच कराये।

टीम अन्ना के प्रमुख सदस्य ने कहा, अगर इस जांच में हमारे खिलाफ आरोप साबित होते हैं तो हम कानून में लिखी सजा से दोगुना दंड भुगतने को भी तैयार हैं। केजरीवाल ने यह भी कहा कि देश का राष्ट्रपति चुनाव राजनीतिक पार्टियों के दंगल का शिकार हो गया है। उन्होंने कहा, सियासी दल महज दांव-पेंचों और सौदेबाजी में लगे हैं। वे इस मुद्दे पर कोई बात नहीं कर रहे हैं कि देश को अच्छा राष्ट्रपति मिले। बहरहाल, जब उनसे पूछा गया कि वह व्यक्तिगत तौर पर किस शख्सियत को राष्ट्रपति पद के लिये सही मानते हैं तो उन्होंने इसका जवाब टाल दिया।

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