क्या होगा ममता का, यूपीए में रहेंगी या नहीं?

इस बैठक में टीएमसी के सभी सांसदों, विधायकों और मंत्रियों को शामिल होने का फरमान भेज दिया गया है। माना जा रहा है कि बैठक में ममता यह फैसला ले सकती हैं कि वह यूपीए के साथ रहेंगी अथवा नहीं? कलाम के नाम वापस लेने से सबसे बड़ा आघात ममता को लगा है, क्योंकि यहाँ बात उनके मान सम्मान की थी।
सूत्रों ने ये भी बयाता की राष्ट्रपति चुनाव के मसले पर ममता ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिससे तमाम राजनैतिक खेमों में खलबली मच गयी है ममता ने कहा है कि इस पद के लिए पर्दे के पीछे डील हो रही है। ममता ने भ्रष्टाचार और खरीद-फरोख्त के खिलाफ आवाज़ उठाई और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए पिछले दो-तीन दिन में हुए घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए गड़बड़ियों के कई संकेत दिए।
खैर जो भी हो वर्तमान स्थिति को देखें तो ममता बनर्जी पूरी तरह अलग-थलग पड़ चूकी हैं। वो यूपीए को छोड़ना चाहती हैं, या नहीं यह तो वही बता सकती हैं, लेकिन यूपीए उन्हें नहीं छोड़ना चाहती है। यही कारण है कि सोनिया गांधी ने अपने अग्रदूत दिग्विजय सिंह को उन्हें मनाने के लिए लगा दिया है। हालांकि खबर यह भी है कि प्रणब मुखर्जी खुद भी ममता को मनाने की कोशिश कर सकते हैं।












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