सोनिया से जो टकरायेगा चूर-चूर हो जायेगा

प्रणब मुखर्जी के नाम पर सबसे पहले सोनिया और ममता के बीच लंबी बातचीत हुई। बैठक के तुरंत बाद ममता ने मीडिया के सामने ऐलान किया कि प्रणब दा उनकी पहली पसंद हैं, लेकिन ठीक एक घंटे बाद मुलायम सिंह से वार्ता हुई और देखते ही देखते ममता पलट गईं। उन्होंने कहा कि अब उनके प्रत्याशी एपीजे अब्दुल कलाम, मनमोहन सिंह या सोमनाथ चटर्जी में से कोई होगा। जिस तरह ममता ने अपने तीखे तेवर दिखाये उससे साफ दिखा कि वो सोनिया गांधी को ललकार रही हैं।
सच पूछिए तो ममता ने अपने तीखे तेवर सिर्फ मुलायम के दम पर दिखाये थे। उस समय मुलायम को वो अपने काफी करीब समझ रहीं थीं। ममता को लगने लगा था कि अगर सरकार गिर गई तो वो मुलायम के संग मिलकर तीसरा मोर्चा बना सकती हैं, लेकिन राजनीतिक बिसात उस समय पलट गई, जब मुलायम ने ममता का साथ छोड़ दिया। मुलायम शुक्रवार को अपनी जबान से पलट गये और झट से यूपीए के पाले में आ गये।
मजेदार बात यह है कि यूपीए को बाहर से समर्थन देने वाले मुलायम प्रणब के नाम पर सोनिया को आश्वस्त कर तुरंत लखनऊ चले गये। यहां दिल्ली में में ममता पूरी तरह अकेले पड़ गईं। ममता अपनी भड़ास निकालते हुए मीडिया पर बरस पड़ीं। ममता ने मीडिया से कड़े शब्दों में कहा कि मीडिया उनके मुंह में किसी दूसरे के शब्द न डाले...
कुल मिलाकर देखा जाये तो इस समय ममता के ईगो को काफी ठेस पहुंची है। ऐसे में उनका यूपीए में रहना अब मुश्किल हो गया है। हालांकि हम आपको बता दें कि यूपीए यह कतई नहीं चाहती कि ममता उन्हें छोड़ कर जायें। वहीं इस बात के भी संकेत हैं कि ममता के पास यूपीए के अलावा फिलहाल कोई अन्य विकल्प नहीं है। सूत्रों के मुताबिक प्रणब दा वित्तमंत्री पद से इस्तीफा देने से पहले अब खुद ममता को प्रेम की बोली बांग्ला में मनाने की कोशिश करेंगे। क्योंकि ममता को अगर कोई मना सकता है तो वो प्रणब दा ही हैं।












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