जाट आरक्षण को लेकर चिदंबरम से मिला मंत्रियों को शिष्टमंडल

शिष्टमंडल में पांच राज्यों-हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सांसद, पूर्व सांसद, विधायक आदि वरिष्ठ नेता शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल में राजस्थान से केन्द्रीय राज्य मंत्री महादेव खंडेला और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष चन्द्र भान, हरियाणा से अखिल भारतीय कांगे्रस समिति के महासचिव चौधरी बीरेन्द्र सिंह, सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा, श्रुति चौधरी और जितेन्द्र सिंह मलिक, पूर्व सांसद जय प्रकाश, मुख्य संसदीय सचिव धर्मबीर सिंह और विधायक आनंद सिंह दांगी, दिल्ली से विधान सभा अध्यक्ष योगानन्द शास्त्री और सांसद रमेश कुमार, पंजाब से विपक्ष के नेता सुनील जाखड़, उत्तर प्रदेश से पूर्व सांसद बिजेन्द्र सिंह और हरेन्द्र सिंह मलिक तथा विधायक पंकज मलिक शामिल थे।
गृह मंत्री से बातचीत में शिष्टमंडल के सदस्यों ने कहा कि जाट मुख्य रूप से ग्रामीण और कृषक समुदाय के हैं, जिनका देश के अनाज भंडार में बडा योगदान है। लेकिन यह भी वास्तविकता है कि इस समुदाय के 95 प्रतिशत लोग मामूली किसान हैं,जिनके पास रोजगार के लिए दो एकड़ से भी कम की जोत हैं। जाट समुदाय में इस तरह की भावना है कि समान पृष्ठभूमि वाले अन्य कृषक समुदायों के मुकाबले उन्हें आरक्षण के लाभ से वंचित रखा गया है। इससे उन्हें लगता है कि उनके साथ भेदभाव हुआ है। शिष्टमंडल ने इस बात पर भी जोर दिया कि विभिन्न राज्यों के जाटों और उनके जैसे अन्य समुदायों के साथ विभिन्न राज्यों में अलग-अलग तरह से व्यवहार नहीं होना चाहिये। शिष्टमंडल ने केन्द्र सरकार से आग्रह किया कि वह इस मुददे पर तत्परता, गम्भीरता और सहानुभूति के साथ विचार करे। उन्होंने कहा कि ओबीसी सूची में जाटों को शामिल करना उनके साथ सामाजिक न्याय करने जैसा होगा।












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