यूपी विधानसभा में जबर्दस्त हंगामा, विधायकों में धक्कामुक्की

इस हंगामे का सबसे बड़ा कारण यह है कि अखिलेश यादव ने सीएम पद संभालते ही बसपा सरकार में हुए घोटालों की फाइनलें खुलवानी शुरू कर दीं, जो मायावती को बर्दाश्त नहीं हो रहा है। लिहाजा बसपाईयों ने अभी से ठान ली है कि वो सदन को नहीं चलने देंगे।
हंगामा करने में भारतीय जनता पार्टी के विधायक भी पीछे नहीं हैं। भाजपा विधायकों ने प्रदेश की कानून व्यवस्था के खिलाफ हंगामा किया। उनका साथ कांग्रेस पार्टी के विधायक भी पीछे नहीं रहे। कांग्रेस का दावा है कि उसके विधायकों ने लोकतांत्रिक ढंग से विरोध दर्ज किया है।
इससे पहले विधानसभा की कार्यवाही सुचार रूप से चलाने के लिये अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने सर्वदलीय बैठक कर नेताओं से सहयोग की अपील की है। वहीं मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही अखिलेश यादव ने 15 मार्च को ही कह दिया था कि सत्र ल बा चलायेंगे ताकि जनता की समस्याओं से रूबरू होकर उसका निदान किया जा सके। मु यमंत्री ने विपक्ष से सहयोग देने का आग्रह किया है।
उनका कहना है कि सरकार सभी सवालों का जवाब देने के साथ ही हर मुद्दे पर बहस के लिये तैयार है। विधानमंडल का बजट सत्र 29 जून तक चलने की संभावना है। सत्र के दौरान ही नगरीय निकायों के चुनाव होने हैं इसलिये सत्र के कार्यक्रम में कुछ फेरबदल की भी स भावना है। वहीं संसदीय कार्यमंत्री आजम खां का कहना है कि विपक्ष यदि चाहेगा तो सत्र ल बा चल सकता है। सरकार को इसमें कोई आपत्ति नहीं है।
बसपा प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा में नेता विपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य का कहना है कि अखिलेश यादव के मात्र दो महीने के कार्यकाल में ही राज्य की कानून व्यवस्था ध्वस्त हो गयी है। उनकी पार्टी इन विषयों को सदन में मजबूती के साथ उठायेगी। कानून-व्यवस्था और किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरने में कसर नहीं रखी जायेगी।












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