बलात्कार को लेकर सरकार और सुप्रीम कोर्ट सख्त

वहीं नाबालिग बच्चों को यौन उत्पीड़न के खतरे से बचाने और ऐसे अपराध के दोषियों को उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान करने वाले विधेयक को मंगलवार को संसद की मंजूरी मिल गई है। विधेयक में यौन उत्पीड़न के ऐसे मामलों की जल्द सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने का प्रावधान है।
बिल पर कृष्णा तीरथ ने कहा कि विधेयक के दायरे में 18 साल से कम उम्र के सभी लड़के-लड़कियों को शामिल किया गया है। इसमें छह तरह के यौन बर्ताव के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। पोर्न फिल्मों में बच्चों के इस्तेमाल को भी इस विधेयक के तहत लाया गया है। ऐसे मामलों में पुलिस को 30 दिन के भीतर पीडि़त का बयान दर्ज करना होगा और एक साल में मामले को हल करना होगा।
मुकदमे की सुनवाई के लिए पीडि़त चाहे तो अपने घर या किसी अन्य जगह के चयन के लिए स्वतंत्र होगा। यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज न करने पर पुलिस अफसर पर भी कार्रवाई हो सकती है।












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