नक्सलियों को बेचे जा रहे है प्री-एक्टिवेटेड सिमकार्ड

यह सनसनीखेज खुलासा किया क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़े दो सिमकार्ड बेचने वाले एजेंटों ने किया। पुलिस ने बताया कि सर्विलांस से बचने के लिए यूपी ईस्ट से खरीदे गये सिमकार्डो का प्रयोग दूसरे प्रदेश में किया जाता है।
एसपी क्राइम विपिन मिश्र ने बताया कि क्राइम ब्रांच की टीम ने मंगलवार की शाम हजरतगंज इलाके से एक सिमकार्ड फ्रेन्चाइजी में काम करने वाले दो एजेंटों रामकुमार और कपिल दीक्षित को पकड़ा। पुलिस ने दोनों के पास से 37 सिमकार्ड, 82 (कैफ कंज्यूमर आथेनटिकेशन फार्म), 82 आइडी, 80 फोटेग्राफ और मोबाइल फोन बरामद किये।
पकड़े गए दोनों आरोपी ग्राहक की आईडी की मदद से बीएसएनएल से कई सिमकार्ड हासिल करते थे। उसके बाद फर्जी ढंग से सिमकार्ड को एक्टिवेट भी करा लेते थे। सिमकार्ड एक्टिवेट होने के बाद उसे उंचे दामों में ऐसे लोगों को बेच देते थे जो गलत कार्य करना चाहते थे और अपनी पहचान भी छिपाना चाहते हैं।
छानबीन में क्राइम ब्रांच को इस बात का पता चला है कि प्री एक्टिवेटेड सिमकार्ड को बिहार और झारखण्ड में भी बेचा जाता है। इन सिमकार्डो को नक्सली गुट भी इस्तेमाल करते थे। क्राइम ब्रांच अब इस मामले में तेज कुमार प्लाजा स्थित बीएसएनएल फ्रेन्चाइजी मालिक केपी मित्तल से भी पूछताछ करने की तैयारी में है।
क्राइम ब्रांच इस बात का भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि एक ही व्यक्ति की आईडी पर बीएसएनएल कैसे इतने सिमकार्ड एक्टिवेट कर देता था। पूछताछ में इस बात का खुलासा भी हुआ है कि पकड़े गए दोनों एजेंटों ने अभी तक 1500 से 2000 सिमकार्ड फर्जी ढंग से बेचे हैं।
एसपी क्राइम विपिन मिश्र ने बताया कि यूपी ईस्ट से खरीदे गये सिमकार्ड अगर दूसरे प्रदेशों में अपराधिक वारदात में प्रयोग हो रहे है तो सबसे बड़ी दिक्कत सर्विलांस पर लेकर छानबीन करने की आती है। कारण है कि सिमकार्ड दूसरे प्रदेश का होता है और आपरेट दूसरे प्रदेश में किया जा रहा है।












Click it and Unblock the Notifications