डीजल का दाम नहीं बढ़ा पाएगी सरकार

गौरतलब है कि मंगलवार को सरकार ने डीजल की कीमत को विनियंत्रित करने के अपने साल भर पुराने फैसले का जिक्र क्या किया, विपक्षी दलों के साथ ही सहयोगी दल तृणमूल कांग्रेस की भी भृकुटियां तन गई। ऐसे में सरकारी तेल कंपनियों की मुसीबत हाल-फिलहाल खत्म होती नहीं दिख रही है। राज्यसभा में वित्त राज्यमंत्री नमोनारायण मीणा ने एक प्रश्न के लिखित जवाब में कहा कि, डीजल की कीमत को विनियंत्रित करने का सैद्धांतिक फैसला हो चुका है।
मीणा के इस बयान के मीडिया में आते ही भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावेडकर ने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार बहुत जल्द ही डीजल की कीमत बढ़ाने जा रही है। सरकार के इस तरह के किसी भी कदम का भाजपा पूरा विरोध करेगी। वहीं यूपीए की सहयोगी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने भी साफ कर दिया कि वह पेट्रो मूल्यवृद्धि पर अपने अडि़यल रवैये में कोई बदलाव नहीं करने जा रही। तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुखेंदु राय ने कहा कि उनकी पार्टी डीजल की कीमत तय करने का अधिकार तेल कंपनियों को देने का विरोध करेगी।
दरअसल, डीजल मूल्य विनियंत्रण का सैद्धांतिक फैसला पिछले वर्ष जून में ही हो गया था, लेकिन विरोध के चलते इस पर कभी अमल नहीं हुआ। डीजल की कीमत आज भी सरकार ही तय करती है। यही वजह है कि सरकारी तेल कंपनियां डीजल को 12 रुपये प्रति लीटर के घाटे पर बेच रही हैं।
उधर, सियासी गलियारे में चर्चा है कि तृणमूल का रवैया ऐसे ही रहा तो सरकार के लिए डीजल के दामों में वृद्धि करना न केवल नामुमकिन होगा बल्कि उसे इस बार भी अपने कदम वापस खींचने पड़ेंगे।












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