कितना खतरनाक है आपका मकान, एमसीडी के इंजीनियर बताएंगे

Building
दिल्ली (ब्यूरो)। आपका मकान कितना सुरक्षित है। यह आप आसानी से पता कर सकेंगे। जैसे यह किस स्तर का भूकंप झेल सकता है। या वर्तमान में ही यह खतरनाक हो चुका है। दिल्ली में इंजीनियर में आपके घर जा कर जांच करेंगे कि यह कितना खतरनाक है। हालांकि सवाल यह है कि खतरनाक मकान सिर्फ पहचान करने से क्या हो जाएगा, जब तक कि उसका कोई विकल्प न हो। जबकि दिल्ली सरकार विकल्प पर खामोश है।

एमसीडी के 300 इंजीनियरों को तैयार किया जा रहा है। शुरुआत पचास इंजीनियरों से हुई है। ट्रेनिंग पाए इंजीनियर बिना इंजीनियरिंग केलकुलेशन के रैपिड विजुअल स्क्रीनिंग से मकान की मजबूती बता सकेंगे। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीएमए) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट ने मिलकर ट्रेनिंग शुरू की है।

सेसमिक असेसमेंट ऑफ बिल्डिंग इन दिल्ली बाई रैपिड विजुअल स्क्रीनिंग के नाम से शुरू चार दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम में आईआईटी कानपुर समेत कई जगह के एक्सपर्ट इंजीनियर को तकनीक बताएंगे।

कार्यक्रम की शुरुआत एनडीएमए के उपाध्यक्ष एम शशिधर रेड्डी और उपराज्यपाल ने की। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट के कार्यकारी निदेशक डा. सतेंद्र ने बताया दिल्ली की बहुत सी इमारतों की रेगुलर जांच और मॉनिटरिंग जरूरी है। मकान गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं। निर्माण का गलत तरीका, स्ट्रक्चरल सेफ्टी जांचने के लिए रजिस्टर या एक्सपर्ट एजेंसी का न होना कारण है। असुरक्षित मकानों की पहचान जरूरी है। यही वजह है कि इंजीनियर की ट्रेनिंग शुरू की गई है।

दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव विजय देव ने बताया कि इंजीनियरों की ट्रेनिंग से दिल्ली को तैयार करने के अभियान को बल मिलेगा। असुरक्षित बिल्डिंग को परखने की क्षमता अभी हमारे पास नहीं है। जल्दी असेसमेंट करने की विशेषज्ञता नहीं है। ट्रेनिंग से इंजीनियरिंग बिना केलकुलेशन के असुरक्षित भवनों को आसानी से पहचान सकेंगे। इन्हें इसी के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

उपराज्यपाल तेजेंद्र खन्ना का कहना है कि दिल्ली में असुरक्षित इमारतें सिर्फ ढूंढने से काम नहीं चलेगा। सिर्फ बीमारी ढूंढने से हमारी जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। उसका इलाज भी जरूरी है। जहां रेट्रोफिटमेंट हो सकती है, उसे करें। रेट्रोफिटमेंट नहीं हो सकती तो असुरक्षित इमारत को गिराकर नई इमारत बननी चाहिए। असुरक्षित इमारतों की जल्दी पहचान का तरीका सीखने वाले ट्रेनिंग प्रोग्राम की शुरुआत करने पहुंचे तेजेंद्र खन्ना ने यह भी साफ किया कि अभी हमें नहीं पता कि कितनी इमारतें असुरक्षित हैं।

चालीस लाख मकान वाली दिल्ली में ऐसी इमारतों को ढूंढना भी एक चुनौती है। यही वजह है कि इंजीनियर्स ट्रेंड किए जा रहे हैं। जब असुरक्षित इमारतें ढूंढ लेंगे तो इसे रेट्रोफिटमेंट से ऐसी मजबूती देने की जरूरत है कि झटके में न गिरे। अगर रेट्रोफिटमेंट नहीं हो सकता तो उसे गिराकर निर्माण करें।

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