नरेंद्र मोदी के शब्‍दों से ज्‍यादा काम बोलता है

Narendra Modi
नरेंद्र मोदी ने एक बिंदु उठाया जो वाकई में गौर करने योग्‍य है। यह देश के लिए अच्‍छा नहीं है कि उसकी सेना जंग के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। वास्‍तव में नरेंद्र मोदी ने यह सवाल खड़ा कर के

सभी को स्‍तब्‍ध कर दिया।

पिछले दशक में आंतरिक सुरक्षा के अध्‍ययन के लिए गुजरात को केस स्‍टडी के रूप में देखा जाने लगा। और यहां की पुलिस फोर्स के मनोबल को हमेशा ऊंचा रखने के प्रयास किये गये। जब अहमदाबाद में जुलाई 2008 में आतंकियों ने हमला किया तब मोदी ने त्‍वरित प्रतिक्रिया देते हुए लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया और तुरंत राहत कार्य के निर्देश दिये। सभी काम तेजी से हुए। वास्‍तव में यह सराहनीय है कि पुलिस ने संदिग्‍धों को धर दबोचा और कोर्ट में उनका मामला तेजी से चल रहा है। अहमदाबाद धमाकों में गुजरात पुलिस के कार्य की हर जगह सराहना की गई।

यहां तक पिछले एक दशक में गुजरात की कानून व्‍यवस्‍था में बहुत सुधार हुआ है। वो दिन चले गये जब अहमदाबाद की सड़कों पर कर्फ्यू लगना आम था। वो दिन भी लद गये जब लतीफ जैसे अपराधी आतं‍की साजिश वारदातों को अंजाम देने की फिराक में हुआ करते थे। इसी‍लिए जब मोदी जैसे नेता आंतरिक सुरक्षा पर कमेंट करें तो जरा सोचिये लोग क्‍या बात करते होंगे। उन्‍होंने जो भी बातें कहीं, सब अनुभव के आधार पर कही।

दिल्‍ली में एकता का इतिहास

भारतीय राजनीति में पिछले कई वर्षों से मुख्‍यमंत्रियों की बैठकों में ऐसा कभी नहीं दिखा कि मुख्‍यमंत्री किसी एक मुद्दे पर एक हो गये हों। खास तौर से इस बार तो एनडीए, यूपीए और तथा कथित तीसरे मोर्चे से ताल्‍लुक रखने वाले मुख्‍यमंत्री एक जुट हो गये। मोदी के पक्ष से हम सभी वाकिफ हैं। लगभग यही सवाल यूपीए की ममता बनर्जी, एनडीए के प्रकाश सिंह बादल और गैर एनडीए, गैर यूपीए सीएम जैसे जयाललिता और नवीन पटनायक ने उनका समर्थन किया। मुख्‍यमंत्रियों के इस समूह ने यूपीए की नींद हराम कर दी है, खास तौर से प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की।

यह एकता 1980 के दौर की याद दिलाती है, जब राजीव गांधी के खिलाफ ज्‍योति बसु एक तरफ थे और वाजपेयी और आडवाणी दूसरी तरफ बाकी के लोग बीच में खड़े थे। मुख्‍यमंत्रियों को एकजुट करने का मोदी ने जो काम किया है वह एक कदम आगे है।

बैठक के ठीक बाद नवीन पटनायक के साथ नरेंद्र मोदी तुरंत जयाललिता से मुलाकात करने टीएन भवन पहुंचे। वही एक मात्र भाजपा मुख्‍यमंत्री थे, जो दो गैर-एनडीए और गैर यूपीए मुख्‍यमंत्रियों के साथ मिले।

कुल मिलाकर देखा जाये तो इस बैठक का सार काफी जटिल है- यह दर्शाता है कि कई गैर-एनडीए और गैर यूपीए सहयोगी पहले भी नरेंद्र मोदी के साथ रह चुके हैं। मोदी के सद्भावना उपवास के दौरान प्रकाश सिंह बादल खुद अहमदाबाद आये थे। शिवसेना ने भी सहयो‍ग किया था। इस मौके पर एनडीए के रामदास अटवाले भी वहां थे। खास कर मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भी वहां शिरकत की।

डा. सुब्रमण्यिम स्‍वामी ने भी मोदी के पक्ष में कई बातें कहीं। इसलिए कुल मिलाकर यह कहना कि मोदी कुछ नहीं कर सकते, अस्‍वीकार्य है। इस मीटिंग के बाद अन्‍य खिलाड़ी भी फोरम में आ गये हैं। यह क्‍या दर्शाता है? यही कि वो अभी भी नेता है, जो वाजपेयी की तरह गठबंधन में सबको बांध कर रख सकते हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+