यूपी में आसान नहीं है भाजपा के नये अध्यक्ष की राह

BJP Flag
लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश में भाजपा की हार के बाद हुए फेरबदल में डाक्टर लक्ष्मीकांत बाजपेयी को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंप दी गयी है। डा. बाजपेयी के लिए इस पद को संभाल पाना बड़ी चुनौती है। पार्टी की अंदरूनी कलह जहां उनका पीछा नहीं छोड़ेगी वहीं पद संभालते ही उनके सामने निकाय चुनाव की जि मेदारी है जिससे निभाना भी आसान नहीं है।

सूर्य प्रताप शाही के नेतृत्व में भाजपा ने विधानसभा का चुनाव लड़ा और हालत यह रही कि अपनी कुर्सी बचाने और सभी को साधने के चक्कर में शाही ने वह सभी काम किये जिससे पार्टी के दिग्गज खुश रहें मगर इसके बावजूद भी वह सभी को संतुष्ट करने में नाकामयाब रहे। पार्टी में कई गुटों ने उनपर कार्यकारिणी गठन के बाद से ही हमला कर दिया और उनके द्वारा की गयी नियुक्तियों पर ही सवालिया निशान लगा दिया।

शाही को इसका खमियाजा भी भुगतना पड़ा और उनको विधानसभा में मिली करारी हार के कारण इस्तीफा देना पड़ा। प्रदेश अध्यक्ष की बागडोर हाथ में आने के बाद डाक्टर बाजपेयी के लिए जरूरी है कि वह भाजपा के हितों के बारे में ही सोंचे क्योंकि प्रदेश में अभी तक जितने भी संघ के लोग बैठाये गये हैं उन्होंने कभी पार्टी के बारे में नहीं सोचा केवल अपने निजी स्वार्थ में लगे रहे। पार्टी में जमीनी कार्यकर्ताओं को महत्व नहीं मिला।

लोकसभा में करारी हार के बाद शाही को यूपी की कमान सौंपी गयी थी और उनके सामने 2012 का विधानसभा चुनाव था मगर जिस तरह से उन्होंने पदाधिकारियों की ल बी फौज तैयार की उससे लग गया था कि इसका भी बंटाधार ही है। वैसे अब नये प्रदेश अध्यक्ष को यूपी में पार्टी को मजबूत करना है तो उन्हें जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर उनको संगठन में तरजीह देनी होगी और अभी से उनको तैयार कर निकाय चुनाव में जुटने के लिए कहना होगा। निकाय चुनाव से ही यह अन्दाजा लग जायेगा कि भाजपा लोकसभा चुनाव के लिए कितनी तैयार है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+