यूपी की राजगद्दी पर बैठा 'टीपू' सु्ल्तान, धूमधाम से हुई ताजपोशी

राजनीति से दूर रहकर व्यवसाय करने का इरादा बनाने वाले पर्यावरण इंजीनियर अखिलेश यादव पर यूपी की जनता इतना भरोसा जतायेगी इस बात का इल्म खुद सपा को भी ना था। मुलायम से इतर राजनीति करने का दावा करने वाले सपा के युवराज को उनके घरवाले टीपू कहकर बुलाते हैं। उनकी मुस्कुराती हुई छवि और विकास की बातें ही इस बार के सियासी सफर में सपा को आगे ले आयी है।
यूपी के लोगों को लगने लगा है कि इस बार सपा जातीय परिवेश से उठकर विकास और शिक्षा की बात करेगी। इसलिए जनता ने साईकिल पर मुहर लगायी। और वो हो गया जो मुलायम सिंह अपने पूरे सियासी जीवन में नहीं कर पाये। सपा का आंकडा 224 को पार कर गया। यह अखिलेश का ही जादू है, लोगों को लगता है कि अखिलेश ही यूपी की तस्वीर बदल सकते हैं।
आपको बता दें कि अखिलेश का जन्म एक जुलाई 1973 को इटावा में हुआ था। अखिलेश की प्रारम्भिक शिक्षा राजस्थान के धौलपुर सैनिक स्कूल मे हुआ। उसके बाद अखिलेश मैसूर विश्वविद्यालय से पर्यावरणीय प्रौद्योगिकी में स्नातक और आस्ट्रेलिया के सिडनी विश्वविद्यालय से परास्नातक की उपाधि हासिल की।
साल 2000 में राजनीति में कदम रखने वाले अखिलेश ने कन्नौज लोकसभा सीट से उपचुनाव जीता औऱ संसद पहुंचे। जिसके बाद से अखिलेश लगातार कन्नौज लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। राज्य की 16वीं विधानसभा के चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले ही अखिलेश ने कभी क्रांति रथ यात्रा तो कभी पार्टी के चुनाव चिन्ह साइकिल से युवकों और समर्थकों की यात्राएं निकाल कर पूरे प्रदेश में दौरा किया और यह बताने की कोशिश की वो भी आम जनता की ही तरह है।
जिसका नतीजा यह हुआ कि 38 साल का गबरू जवान लोगों के दिलों में जगह बनाने में कामयाब हो गया। और यूपी को बर्षों बाद एक नयी पीढी वाला राजा मिला जिसका नाम टीपू है।












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