आर्थिक वृद्धि दर घटी, रोजगार आसार बढ़े

इनमें से 8 लाख नौकरियां आईटी और बीपीओ क्षेत्र में मिलीं। समीक्षा में कहा गया है कि रोजगार के मोर्चे पर देश वैश्विक वित्तीय संकट से निपटने में सफल रहा है। 2009 से यहां नौकरियों का सृजन हो रहा है। इसमें कहा गया है कि रोजगार सृजन का सरकार का कार्यक्रम दीर्घावधि के परिदृश्य से तैयार किया गया है और इनमें संरक्षणवाद का कोई तत्व नहीं है। समीक्षा में कहा गया है कि ग्रामीण परिवारों के जीवनस्तर को सुधारने के लिए शुरू किया गया मनरेगा कार्यक्रम काफी सफल रहा है।
मनरेगा से न केवल रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं, बल्कि इससे गरीबों को भी अतिरिक्त आमदनी मिली है। हालांकि इससे मांग बढ़ी है, जो उंची खाद्य मुद्रास्फीति की वजह है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) के तहत प्रत्येक परिवार को एक वित्त वर्ष में कम से 100 दिन का रोजगार देने का प्रावधान है।
इसमें एक-तिहाई महिलाएं होनी चाहिए। समीक्षा में बताया गया है कि सितंबर, 2011 को समाप्त एक साल की अवधि में कुल रोजगार में 9.11 लाख की वृद्धि हुई। इनमें से 7.96 लाख नौकरियां आईटी-बीपीओ क्षेत्र में, 1.07 लाख धातु, 71 हजार वाहन, 8 हजार रत्न एवं आभूषण तथा 7 हजार चमड़ा उद्योग में दी गईं।












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