जाट आंदोलन से अलग हुई खाप

दूसरी तरफ जाट आरक्षण संघर्ष समिति मंगलवार सुबह 11 बजे बैठक करके फैसला करेगी कि सरकार के आश्वासन के अनुसार उन्हें आंदोलन स्थगित करना है या नहीं। इससे पूर्व जाट आरक्षण को लेकर खाप प्रतिनिधियों की कमेटी और मुख्यमंत्री के बीच हुए समझौते की जानकारी आंदोलनकारियों को देने के लिए खाप प्रमुखों की कमेटी ने रामायण व माइयड़ गांव के बीच आंदोलन कर रहे जाट समुदाय के लोगों को दी।
सरकार व खाप प्रमुखों के बीच हुए समझौते को लेकर आंदोलनकारियों में आम राय नहीं बन पाई। इसको लेकर अब विभिन्न स्थानों पर बैठे आंदोलनकारियों के साथ विचार-विमर्श करने का फैसला किया गया। इसी के तहत मंगलवार सुबह 11 बजे संघर्ष समिति की बैठक होगी जिसमें यह फैसला किया जाएगा कि आंदोलन जारी रखा जाए या नहीं।
मुख्यमंत्री के साथ हुई बातचीत की जानकारी देने के लिए खाप कमेटी के सदस्य करीब डेढ़ माइयड़ में रेलवे ट्रैक के साथ बैठे आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे। कमेटी सदस्यों ने सरकार से हुए समझौते की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समझौते के अनुसार आंदोलनकारियों पर दर्ज हुए केस वापस लेने, शहीद सुनील श्योराण की स्मृति में माइयड़ में खेल स्टेडियम बनाने तथा पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट आने के बाद छह माह के अंदर प्रदेश में आरक्षण देने व केंद्र को आरक्षण की सिफारिश किया जाना शमिल है।
समझौते की जानकारी देने के बाद वहां पर हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई। ट्रैक के साथ बैठे आंदोलनकारियों में काफी संख्या में लोग समझौते से खुश नजर नहीं आए और उन्होंने इसका विरोध किया। खाप प्रमुखों ने आंदोलनकारियों को काफी देर तक समझाने का प्रयास किया लेकिन वे नहीं माने। आंदोलनकारियों के रवैये से नाराज खाप प्रमुखों ने कहा कि यदि उनकी बात को नहीं माना गया तो वे इस आंदोलन से दूर हो जाएंगे।
उनकी इस चेतावनी के बाद भी आंदोलनकारी शांत नहीं हुए तो खाप प्रमुख आंदोलन स्थल से उठकर चले गए। खापों द्वारा एक सप्ताह के अंदर ही आंदोलन से हट जाने से जाट आरक्षण आंदोलन को करारा झटका लगा है। खापों के अलग हो जाने के बाद वहां बैठे जाट आरक्षण संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने विचार विमर्श किया और फैसला लिया कि विभिन्न स्थानों पर आंदोलन कर रहे लोगों से बातचीत की जाएगी और उसके बाद ही आंदोलन के भविष्य का निर्णय लिया जाएगा।
रविवार को रेलवे ट्रैक के साथ आंदोलनकारियों के बीच नहीं आने को लेकर कमेटी सदस्यों ने कहा कि वो यहां पास में ही थे और कमेटी ने यह निर्णय लिया था कि सभी सदस्य एक साथ यहां पहुंचेंगे और समझौते की जानकारी देंगे, लेकिन कुछ सदस्य किन्हीं कारणों से नहीं पहुंच पाए, जिसके कारण वो यहां नहीं पहुंचे।












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