यूपी चुनाव के छठे चरण की सीट वार समीक्षा

उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के छठे चरण में 60 फीसदी मतदान ने साफ कर दिया है कि जाट और मुसलमानों के गढ़ में जागरूकता आ चुकी है। भारी संख्‍या में मतदान ने उन पार्टियों की चूलें हिला दी हैं, जिनका यहां पिछले कई वर्षों से दबदबा बना हुआ है। प्रस्‍तुत है इस चरण की प्रत्‍येक सीट की समीक्षा, जिसमें बसपा, सपा और खास तौर से रालोद-कांग्रेस गठबंधन के बारे में बात करेंगे।

1. बेहात - यह नई सीट पहले सहारनपुर में हुआ करती थी, जिस पर बसपा का दबदबा था। 2009 की 63 प्रतिशत वोटिंग में भी बसपा सबसे आगे थी। इस बार बसपा के लिए यहां सबसे बड़ा इम्‍तहान है।

2. नाकुर – यहां पर 60 से 70 प्रतिशत वोट पड़ना आम है। बात अगर पार्टी की करें तो कांग्रेस का यहां मजबूत होल्‍ड है। लेकिन 2009 में बसपा सबसे आगे रही थी।

3. सहारनपुर नगर – इस सीट पर भी बसपा का दबदबा बना हुआ है।

4. सहारनपुर – यह बसपा का गढ़ है, लेकिन इस बार अगर इस पर कोई अन्‍य पार्टी आयी तो बसपा की प्रतिष्‍ठा पर सवाल खड़ा हो सकता है।

5. देवबंद – यहां भी बसपा का गढ़ है और उसकी प्रतिष्‍ठा दांव पर लगी हुई है।

6. रामपुर मनिहरन (अनुसूचित जाति) – इस नई सीट पर बसपा का दबदबा बना हुआ है।

7. गंगोह – इस नई सीट पर बसपा और भाजपा की टक्‍कर हो सकती है।

8. कैराना– इस सीट पर भाजपा का गढ़ माना जाता है,लेकिन 2009 में बसपा ने पासा पलट दिया था। इस बार देखना है कि भाजपा का क्‍या होता है।

9. थाना भवन – इस सीट पर भाजपा और सपा का गढ़ है। दोनों में कड़ी टक्‍कर होगी।

10. शमली – कांग्रेस के गढ़ में आने वाली इस सीट पर अन्‍य पार्टियां आगे आने की जुगत लगा रही हैं।

11. बुधाना – इस सीट पर रालोद का गढ़ है और 2009 में रालोद ने सबसे ज्‍यादा वोट हासिल किये थे।

12. चर्थावल – यह सीट बसपा ने भाजपा से छीनी थी, अब देखना यह है कि भाजपा वापसी कर पाती है या नहीं।

13. पुरकाजी (अनुसूचित जाति) – इस नई सीट पर बसपा और रालोद में टक्‍कर होने की संभावना है। 2009 में भी ये दोनो सबसे ऊपर थे।

14. मुजफ्फरनगर – यह सीट सपा ने भाजपा से छीनी थी, लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा को सबसे ज्‍यादा वोट यहां से मिले। लिहाजा इस बार तीन पार्टियां टक्‍कर में होंगी।

15. खतौली – इस सीट पर कभी भाजपा का कब्‍जा था, जिसे बाद में रालोद ने हथिया लिया। बसपा ने पुरजोर कोशिशें की लेकिन रालोद से आगे नहीं निकल पायी। 2009 के लोकसभा चुनाव में भी रालोद के वोट सबसे ज्‍यादा थे।

16. मीरपुर – इस नई सीट पर रालोद का दबदबा है।

43. सिवलखास– यह अजित सिंह का गढ़ है और यहां पर रालोद के अलावा किसी की तूती नहीं बोलती।

44. सरधाना – भाजपा के गढ़ में बसपा और रालोद आगे निकलने में प्रयासरत हैं। 2009 में इन दोनो पार्टियों को सबसे ज्‍यादा वोट मिले थे।

45. हस्तिनापुर (अनुसूचित जाति) – इस सीट पर रालोद का कब्‍जा हुआ करता था, जिस पर बाद में बसपा ने पैठ बना ली।

46. किठोर – यह सीट जनता दल, सपा और भाजपा के बीच घूमती रही है। लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने सबसे ज्‍यादा वोट हासिल किये थे। लिहाजा इस बार यह भी लड़ाई में शामिल होगी।

47. मेरठ कैंट. – भाजपा के गढ़ में यहां और किसी भी पार्टी की जीत नजर नहीं आ रही है। 2009 में भी भाजपा सबसे आगे थी।

48. मेरठ – भाजपा का गढ़ हुआ करता था, लेकिन बाद में सपा और कांग्रेस ने यहां अच्‍छी पैठ बना ली। यही कारण है कि लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस सबसे आगे रहे।

49. मेरठ दक्षिण– इस नई सीट पर भाजपा और बसपा की टक्‍कर होगी।

50. छपरौली – इस सीट पर जनता दल और रालोद की टक्‍कर होगी। हालांकि अजित सिंह को मानने वाले वोटरों की संख्‍या यहां अधिक है।

51. बरौत– इस नई सीट पर अजित सिंह का गढ़ है, लिहाजा रालोद की जीत लगभग तय है।

52. बागपत– यहां इस बार सबसे ज्‍यादा वोट पड़े हैं। कांग्रेस/रालोद के गढ़ में दोनो में से कोई भी जीत सकता है। हालांकि बसपा भी टक्‍कर देने में पीछे नहीं रहेगी।

53. लोनी – इस सीट पर राजनाथ सिंह का गढ़ है। लेकिन बसपा पिछले कई सालों से यहां पैठ बनाने में लगी हुई है।

54. मुरादनगर- इस सीट पर कांग्रेस, जनता दल, सपा तीनों की टक्‍कर होने की संभावना है।

55. साहिबाबाद – यहां पर राजनाथ सिंह का गढ़ है, लिहाजा भाजपा को अच्‍छी संख्‍या में वोट मिल सकते हैं।

56. गाजियाबाद – इस सीट पर भाजपा का गढ़ हुआ करता था, लेकिन बाद में सपा और फिर कांग्रेस आयी। फिलहाल राजनाथ सिंह ने यहां भाजपा की वापसी के लिए कड़ी मेहनत की है।

57. मोदीनगर – इस सीट पर अजित सिंह की रालोद का गढ़ है, हालांकि 2009 के चुनाव में अजित सिंह ने कांग्रेस को सिर्फ 3000 वोटों से पछाड़ा था।

58. धौलाना – इस सीट पर राजनाथ सिंह का गढ़ है। उनके प्रभाव से भाजपा को अच्‍छी संख्‍या में वोट मिल सकते हैं।

59. हापुड़ (अनुसूचित जाति) – यह सीट भाजपा, बसपा और कांग्रेस के पास रही है। 2009 के आंकड़ों के मुताबिक कांग्रेस को इस बार बढ़त मिल सकती है।

60. गढ़मुक्‍तेश्‍वर- इस सीट पर भाजपा का गढ़ हुआ करता था, लेकिन बाद में सपा ने कब्‍जा कर लिया। 2009 के आंकड़े रालोद की ओर संकेत दे रहे हैं।

61. नोएडा – यह सीट भाजपा के पास है और उसके वोट यहां पूरी तरह पक्‍के भी हैं।

62. दादरी – यहां भाजपा का गढ़ है, लेकिन 2009 के आंकड़े बसपा की ओर झुकाव दिखा रहे हैं।

63. जेवार – इस सीट पर भाजपा का गढ़ है, लेकिन 2009 में बसपा को सबसे ज्‍यादा वोट उसकी ओर इशारा कर रहे हैं।

64. सिकंदराबाद– यहां पर सपा, बसपा और भाजपा तीनों एक दूसरे को टक्‍कर दे सकते हैं।

65. बुलंदशहर – भाजपा की इस सीट पर बाकी किसी का आना मुश्किल है।

66. स्‍याना – यह सीट कांग्रेस ने भाजपा से छीनी थी, लेकिन 2009 में सपा की बढ़त इस बार जंग को और मजबूत बना सकती है।

67. अनूपशहर– एक समय यहां भाजपा का गढ़ था, लेकिन बाद में कांग्रेस आयी और फिर सपा अपना वर्चस्‍व स्‍थापित करने की जुगत में है।

68. देबाई– कल्‍याण सिंह के गढ़ में सपा और भाजपा पैठ बनाने के प्रयास कर रही हैं।

69. शिकारपुर – इस सीट पर भाजपा का वर्चस्‍व बना हुआ है।

70. खुर्जा (अनुसूचित जाति) – एक समय पर यहां भाजपा का गढ़ था। अब यहां बसपा की तूती बोल रही है। हालांकि 2009 में भाजपा को अच्‍छी संख्‍या में वोट मिले थे।

71. खैर (अनुसूचित जाति) – यहां पर कभी भी 55 फीसदी से ज्‍यादा मतदान नहीं पड़े। यहां पर भाजपा, बसपा और जनता दल में कड़ी टक्‍कर होगी।

72. बरौली – यह सीट भाजपा, बसपा और कांग्रेस के पास रह चुकी है। 2009 के आंकड़े बसपा की ओर इशारा कर रहे हैं।

73. अतरौली – यह सपा का गढ़ है और 2009 में भी सपा सबसे आगे रही थी।

74. छर्रा – इस नई सीट पर बसपा की उम्‍मीदें ज्‍यादा हैं।

75. कोइल – यहां पर भाजपा का गढ़ था, लेकिन बाद में बसपा ने जीती थी। लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव के परिणाम सपा के आने की उम्‍मीद दिखा रहे हैं।

76. अलीगढ़ – यह सीट कांग्रेस ने भाजपा से छीनी थी, लेकिन 2009 में कड़ी मेहनत के साथ भाजपा की वापसी की उम्‍मीद है।

77. इगलास (अनुसूचित जाति) – इस सीट पर भाजपा, बसपा, कांग्रेस की कड़ी टक्‍कर होगी। हालांकि 2009 में रालोद को यहां अच्‍छी संख्‍या में वोट मिले थे।

78. हाथरस (अनुसूचित जाति) – इस सीट पर बसपा का कब्‍जा है। 2009 में रालोद ने उसे कड़ी टक्‍कर दी थी, लिहाजा इस बार भी रालोद के आने की संभावना है।

79. सदाबाद– यह सीट जनता दल, भाजपा और रालोद के बीच रह चुकी है। इस बार रालोद जीत सकती है।

80. सिकंदरा राव – यहां पर बसपा का गढ़ है, लेकिन रालोद इसे टक्‍कर दे सकती है।

81. छाता – इस सीट पर पहले जनता दल का कब्‍जा था, जिसे बाद में कांग्रेस ने फिर रालोद ने हथियाया। इस बार रालोद के आने की पूरी उम्‍मीद है।

82. मंत – यह रालोद का गढ़ है।

83. गोवर्धन– भाजपा के इस गढ़ में रालोद टक्‍कर देगी, क्‍योंकि 2009 में रालोद को सबसे ज्‍यादा वोट मिले थे।

84. मथुरा – इस सीट पर भाजपा का दबदबा है, लेकिन कांग्रेस आ गई। इस बार रालोद की जीत की उम्‍मीद है।

85. बलदेव (अनुसूचित जाति) यहां भी रालोद का गढ़ है।

86. एतमदपुर – इस सीट पर बसपा का कब्‍जा था, जिसे रालोद ने हथियाया और फिर भाजपा ने भी यहां पैठ बनायी। इस बार तीनों के बीच कड़ी टक्‍कर होगी।

87. आगरा कैंट (अनुसूचित जाति) – भाजपा के गढ़ में बसपा ने कब्‍जा किया।

88. आगरा दक्षिण –इस सीट पर भाजपा और बसपा के बीच कड़ी टक्‍कर होगी।

89. आगरा पश्चिम – इस सीट पर भाजपा का गढ़ है। हालांकि कांग्रेस और बसपा कड़ी टक्‍कर दे सकती हैं।

90. आगरा ग्रामीण (अनुसूचित जाति) – इस सीट पर बसपा और कांग्रेस की टक्‍कर होगी।

91. फतेहपुर सीकरी – यह सीट रालोद ने भाजपा से छीनी थी, जिसके वापस हासिल करने के लिए भाजपा ने इस बार कड़ी मेहनत की है।

92. खेरागढ़ – इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस की जंग होती रही है। लेकिन 2009 के आंकड़े भाजपा की जीत की ओर इशारा कर रहे हैं।

93. फतेहाबाद – इस सीट पर भाजपा का गढ़ है, लेकिन 2009 में बसपा ने यहां से सबसे ज्‍यादा वोट हासिल किये। लिहाजा दोनों के बीच टक्‍कर हो सकती है।

94. बाह– यहां भाजपा का गढ़ है और पूरी लहर उसी की ओर बह रही है।

यह समीक्षा ब्‍लॉग ऑफ स्‍टम्‍प्‍ड से अनुवादित है।

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