जानते है हकीकत क्या है, लेकिन कैसे बताए ईरान का नाम

दैनिक हारेत्ज ने एक वरिष्ठ इस्राइली अधिकारी के हवाले से बताया कि भारतीय जांच एजेंसियों ने इस हमले में इस्तेमाल हुई मोटरसाईकिल तथा उसके मालिक का पता लगा लिया है और उन्हें यह भी मालूम चल चुका है कि हमलावर कैसे और कहां से भारत आए थे। अखबार की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय एजेंसियां इस मामले को पूरी तरह से हल करने के करीब हैं लेकिन इस मामले की तहकीकात को सार्वजनिक किये जाने के दबाव से बचने और कई दूसरे महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए अधिक समय तलाशने के इरादे से इस मामले की जांच को जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
उल्लेखनीय है कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दिल्ली विस्फोट की जांच के दौरान अभी किसी देश या संगठन के बारे में कोई निश्चित सुराग नहीं मिला है। दिल्ली स्थित ईरान के राजदूत मेहंदी नबीजादे भी विस्फोट के पीछे उनके देश का हाथ होने के इस्राइल के आरोपों को खारिज कर चुके हैं। अखबार की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारतीय जांचकर्ताओं को जॉर्जिया और थाईलैंड में हुए धमाकों के बाद वहां भी रवाना किया गया था। जांचकर्ताओं ने तीनों देशों के धमाकों में समानता वगैरह का पता लगाने के लिए विस्फोटकों का मिलान किया और उन्हें इसमें ईरान का हाथ होने का सुबूत भी मिला। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय एजेंसियों को इस मामले की जांच में अमेरिका और इस्राइल की ओर से तो भरपूर सहयोग मिला ही है लेकिन बहुत सा काम उन्होंने अपने दम पर ही किया है। इस्राइली दूतावास की कार पर हमले में इस्तेमाल किया गया बम ईरान में बन था। यह बम तेहरान के एक प्रयोगशाला में तैयार किए गए थे। यह ईरानी दूतावास के जरिए मुहैया कराया गया था।
हमले में निशाना बनने से पहले इस्राइली राजनयिक ताल येहोशुआ कोरेन ने इस इलाके में ही अपने पति के साथ लंच किया था। वहीं, जॉर्जिया और थाईलैंड ने अपने यहां हुई घटनाओं के जिम्मेदार संदिग्ध संगठनों और लोगों के बारे में जानकारी दी है। इसमें भी ईरान का नाम आया है। जॉर्जिया की राजधानी तिब्लिसी में इस्राइली दूतावास के पास खड़ी कार में रखे बम को निष्क्रिय कर हमले को नाकाम कर दिया गया था। वहीं बैंकॉक में तीन धमाके करने के आरोप में तीन ईरानी युवकों को गिरफ्तार किया गया है।












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