जब देश के कानून मंत्री ने ही उड़ाईं कानून की धज्जियां

दरअसल चुनाव आयोग ने कानून मंत्री सलमान खुर्शीद को चुनाव के दौरान मुस्लिम वोटरों को लुभाने वाले आरक्षण देने वाले बयान न देने की बात कही थी। जिसके बाद कानून मंत्री ने अपनी पत्नी लुइस खुर्शीद के लिए प्रचार के दौरान कहा कि चाहें उन्हें फांसी दे दी जाए पर वे मुस्लिम आरक्षण की मांग करते रहेंगे। गौरतलब है कि उन्होंने मुस्लिमों को 9 फीसदी आरक्षण दिलाने की बात कही थी।
चुनाव आयोग ने उनके इस बयान के बाद राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखकर उन्हें कार्रवाई कराने की मांग की है। जिसके बाद राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखकर इस मामले में कार्रवाई करने को कहा है।
विपक्षी पार्टियों ने सलामन खुर्शीद के इस मामले में कांग्रेस पर तीखे वार किए हैं। जदयू अध्यक्ष शरद पवार ने कहा है कि चाहें सलमान खुर्शीद उल्टे लटक जाएं तब भी वे मुस्लिमों को आरक्षण दिलाकर रहेंगे।
अपने बयानों में सलमान खुर्शीद ने लोकतंत्र को ही चुनौती दे दी थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि वे आरक्षण दिलाकर ही रहेंगे चाहें चुनाव आयोग रहे हैं या नहीं। उनके इस बयान से कांग्रेस ने पल्ला झाड़ लिया है। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग संविधान का स्तंभ है और उसके खिलाफ बयान देना अनुचित है।
वहीं मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने सरकार से सलमान खुर्शीद को बर्खास्त करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यह सीधे तौर पर आचार संहिता का उलंघन है।
अब ऐसे में एक बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि जब देश का कानून मंत्री ही कानून की धज्जियां उड़ा रहा है तो इसको पालन कौन करेगा। इस समय नेता चुनावों में लाभ लेने के लिए कुछ भी बोलने को तैयार हैं। नेताओं की यह फिसलती जुबान शायद चुनाव पूरे होने के बाद ही संभल पाए।












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