दिल्ली पुलिस ने ली चांदनी महल हादसे की जिम्मेदारी

पुलिस का कहना है कि हादसा पुलिसकर्मियों और एमसीडी के अधिकारियों की लापरवाही से हुआ। पुलिसकर्मी और एमसीडी कर्मी ड्यूटी सही तरीके से निभाते तो हादसे से बचा जा सकता था। पुलिस ने अदालत में सौंपी जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है। तीस हजारी अदालत के विशेष सीबीआई जज अनूप कुमार मेंहदीरत्ता की अदालत में दिल्ली पुलिस की ओर से जांच रिपोर्ट सौंपी गई है।
इसमें कहा गया है कि यदि चांदनी महल पुलिस और एमसीडी सिटी जोन के इंजीनियर ने अपना काम किया होता तो हादसे से बचा जा सकता था। मामले में चांदनी महल की बिल्डिंग के निर्माण और तोड़फोड़ कार्य रोकने के लिए एमसीडी ने 16 सितंबर को नोटिस जारी किया गया था लेकिन जोन के जेई और एई ने कोई कदम नहीं उठाया। नोटिस पर कार्रवाई की जाती तो 27 सितंबर को हादसा नहीं होता। हादसे में सात की मौत और 23 घायल हुए थे।
दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा है कि मामले में चांदनी महल के तत्कालीन एसएचओ सतीश केन, एएसआई शीशपाल और रोहताश के अलावा चार कांस्टेबल की गलती प्रथमदृष्टया सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है। अदालत के आदेश पर मकान बनाने व तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस की ओर से तैयार किए गए दिशा-निर्देश को एमसीडी आयुक्त को भेजा गया है। अदालत ने रिपोर्ट को एसीएमएम मनीष यदुवंशी की अदालत को भेज दिया है। आरोप-पत्र भी इसी अदालत में दाखिल किया गया है।
गौरतलब है चांदनी महल इलाके में 27 सितंबर को रात करीब 8 बजे तीन मंजिला इमारत गिर गई थी। कम से कम 7 लोग मारे गए थे हैं। लाल हवेली के पास 100 साल से ज्यादा पुरानी तीन मंजिला इमारत थी, जिसे लोग जाकिर के मकान के नाम से जानते थे। इसी के बगल में दूसरी बिल्डिंग बन रही थी। कुछ दिन से वहां नींव डालने का काम चल रहा था।












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