चिदंबरम के साथ ही सीबीआई के भी धुले दाग

सीबीआई के एक सूत्र ने बताया कि इस फैसले से साफ हो गया है कि जांच एजेंसी ने 2जी घोटाले की जांच पूरी निष्पक्षता से की थी और इस मामले में किसी को भी जानबूझकर नहीं छोड़ा गया है। दरअसल, सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से लेकर निचली अदालत तक में पहले ही साफ कर दिया था कि 2जी घोटाले की साजिश में चिदंबरम के शामिल होने का कोई सबूत नहीं है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट और शनिवार को ट्रायल कोर्ट दोनों ने सीबीआई के इस निष्कर्ष पर अपनी मुहर लगा दी है। अदालत के फैसले के बाद शायद सीबीआई पर सरकार के इशारे पर जांच करने का इल्जाम नहीं लगे। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जांच से जुड़े सभी दस्तावेज एजेंसी ने दे दिये थे और अदालत ने इन दस्तावेजों को देखने के बाद ही यह फैसला दिया है। उनके अनुसार बिना दस्तावेजी सबूतों के जांच एजेंसी किसी को आरोपी नहीं बना सकती है।
आपको बता दें कि सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओपी. सैनी ने इस आधार पर ही स्वामी की अपील खारिज कर दी कि तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा से सहमत थे कि प्रवेश शुल्क या स्पेक्ट्रम शुल्क की समीक्षा नहीं होगी, लेकिन यह कानून का उल्लंघन नहीं है। मूल्यों की समीक्षा नहीं होना अवैध नहीं है। सक्षम अधिकारी को हमेशा यह छूट होती है कि वह मूल्यों या किसी सामान या सेवा शुल्क की समीक्षा करे या न करे।
न्यायाधीश ने कहा इस मामले में चिदंबरम ने आशय पत्र को जारी करने की प्रक्रिया में तोड़-मरोड़ करने की कोई भूमिका निभाई और न ही राजा के दूरसंचार मंत्री के रूप में स्पेक्ट्रम आवंटन में उनकी कोई भूमिका थी। कोर्ट ने कहा कि आशय पत्र जारी करने, पहले आओ, पहले पाओ की नीति का उल्लंघन सहित प्रक्रिया में तोड़-मरोड़ कथित रूप से दूरसंचार विभाग, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार और निजी लोगों ने किया।












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