सरकार का अनुरोध, माओवादियों को बहाल किया जाए

सीआरपीसी की धारा 321 के तहत अभियोजन पक्ष किसी भी एक व्यक्ति या अधिक के खिलाफ चल रहे मुकदमों को फैसला आने के पूर्व अदालत की सहमति से वापस ले सकता है। समझा जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुरोध पर राज्य सरकार ने यह निर्णय किया है। सिंह ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई कल होने की संभावना है।
नेपाल की सरकार के अनुरोध पर ही भारत सरकार ने 11 माओवादियों के खिलाफ मामले वापस लेने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू की थी। वर्ष 2004 से 11 माओवादी नेताओं के खिलाफ जिला अदालत में मामले लंबित है। इन माओवादी नेताओं को भारत विरोधी और तत्कालीन नेपाल सरकार के खिलाफ गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
वर्ष 2006 में उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुए थे। मई 2004 में पटना में एक होटल से माओवादी नेता सीबी श्रेष्ठ, लोकेंद्र बिष्ट, कुल बहादुर, कुमार दहल, हित बहादुर तमांग, अनिल शर्मा, दिलीप महारजन, रंजू थापा, सुमन तमांग, श्याम किशोर प्रसाद यादव और मीन प्रसाद को गिरफ्तार किया गया था। माओवादियों के मुददे को लेकर नेपाल की संसद में भी बीते वर्ष हंगामा हुआ था।












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